थाना गोवर्धन पुलिस की यातनाओं से हुई युवक महेंद्र की मौत और इससे गुस्साए ग्रामीणों के थाने पर हमला करने की घटना के बाद गांव अड़ींग में तनाव बना हुआ है। पुलिस ने एक दर्जन नामजद और 150 अज्ञात लोगों के बलवे सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। बुधवार रात में दो बजे पुलिस ने गांव में फ्लैग मार्च किया। दहशत के चलते अड़ींग के अधिकांश युवक घर छोड़कर भाग गए।
महेंद्र पिता भगवान सिंह उर्फ बुद्धा कढ़ेरा जाति का था, 20 हजार अधिक की आबादी वाले गांव इस जाति का इनका एक ही परिवार है। मोहल्ला सराय पाइसा थोक में रह रहा बुद्धा सिंह मजदूरी करता है और उसका बड़ा बेटा कन्हैंया टेंपो चलाकर परिवार चलाता है। महेंद्र भी टेंपो पर कंडक्टरी करता था। गुरुवार को हालात यह थे कि मोहल्ला सराय पाइसा में घरों में युवक नहीं दिख रहे। सबको डर है कि किसी भी वक्त पुलिस उनकी गिरफ्तारी कर सकती हैं।
उधर, इस मामले में एसआई हरीशंकर वर्मा ने अड़ीग निवासी उपेंद्र शर्मा, बृजेन्द्र पहलवान, गुल्ली पहलवान, मुखिया सहित एक दर्जन लोगों को नामजद करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई है। इन पर150 अज्ञात लोगों के साथ मिलकर बलवा करने, मारपीट, सरकारी काम में बाधा, गाली गलौज, जान से मारने की धमकी सहित दहशत फैलाने के आरोप लगाए गए हैं।
छह माह के दुधमुंहे बेटे को देख रो रही बेबी
महेंद्र की शादी तीन साल पहले युवती बेबी के साथ हुई थी। छह माह पूर्व बेबी ने बेटे को जन्म दिया। अब बेबी दुधमुंहे बच्चे के लालन पालन व आगे जिंदगी बे पटरी होने की बात कहते हुए दहाड़ें मार मार कर रो रही है।
अस्पताल तो बच सकती थी महेंद्र की जान
गांव में ही नैनसिंह जाटव की पुत्रवधू के जेवर चोरी हो गए थे। उसने महेंद्र खिलाफ थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया जा रहा है कि महेंद्र पर पहले भी कई बार चोरी के आरोप लगे थे। चार दिन पूर्व उसे बुखार आया था। बुखार उतरने पर वह गेहूं पिसाने चक्की पर गया था, तभी पुलिस उसे पकड़कर थाने ले गई थी। इसके बाद उसे चार दिन तक थाने में यातना दी गई और उमस भरे कमरे में बंद कर रखा गया। बुधवार को उसे खून की उल्टियां हुई तो पुलिसकर्मी घबरा गए। पुलिस कर्मी उसके पिता बुद्धा व उसकी मां कमलेश को थाने ले आए। वहां कुछ कागजों पर लिखवाकर उनकी सुपुर्दगी में महेंद्र को दे दिया। उसको उसी समय उपचार के लिए ले जाते तो उसकी जान बच सकती थी।
न आपस में तालमेल और न हालत से निपटने सूझबूझ
गोवर्धन थाने में हुए पथराव व पुलिस पर हमले की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचने को लेकर आसपास की पुलिस में कोई तालमेल नहीं था। सायं करीब चार बजे महेंद्र की मौत होने की सूचना पुलिस को मिल गई थी। हंगामे की आशंका के चलते छह बजे से ही आसपास के थानों से पुलिस बुलाई जा रही थी। पहले ग्रामीण शव लेकर एसएसपी के यहां जाना चाहते थे, इसको लेकर आधा घंटे तक उनमें आपस में भी बहस हुई। बाद में सायं आठ बजे ग्रामीणों ने थाने पर हमला किया। तब तक पुलिस को काफी समय मिला, लेकिन गोवर्धन थाने पर एसओ हाईवे और एसओ मगोर्रा ही पहुंच पाए थे, बाकी थानाध्यक्ष बाद में पहुंचे। ग्रामीणों से बातचीत के प्रयास भी नहीं किए गए।
आश्वासन के बाद हुआ अंतिम संस्कार
गुस्साए ग्रामीणों ने थाने पर बवाल तो कर दिया, लेकिन जब गुस्सा ठंडा हुआ तो कार्रवाई चिंता भी हुई। ग्रामीणों ने महेंद्र के पिता पर दबाव बनाया कि जब तक अधिकारी यह आश्वासन नहीं देते कि ग्रामीणों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी, तब तक शव का दाह संस्कार न किया जाए।
अंतिम संस्कार न किए जाने की सूचना पर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ राजनीतिक दलों के नेता भी गांव में पहुंचने शुरू हो गए। भगवान सिंह हर अधिकारी को गांव में अपना अकेला घर होने की दुहाई देते हुए ग्रामीणों के खिलाफ कोई कार्यवाही न करने की बात कह रहे थे। सपा नेता मुकेश सिकरवार, प्रदेश सचिव प्रदीप चौधरी, पूर्व ब्लाक प्रमुख पति विनोद चौधरी, कांग्रेस नेता कुंवर नरेंद्र सिंह व पूरन कौशिक ने मृतक के परिवारीजनों को सांत्वना दी। प्रदीप चौधरी ने मृतक के परिवारीजनों को पचास हजार रुपये अपने पास से देने की भी घोषणा की। एसडीएम सदर राजेश कुमार ने कोई भी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न करने और ज्यादा से ज्यादा मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी में शव का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान एडीएम ई धीरेन्द्र कुमार, सीओ सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी, सीओ रिफाइनरी आरके गौतम सहित अन्य अधिकारी साथ थे।
डिप्टी कलेक्टर सुरेंद्र करेंगे मजिस्ट्रेटी जांच
जिलाधिकारी ने महेंद्र की मौत और उसके बाद हुए बवाल की मजिस्ट्रेटी जांच डिप्टी कलेक्टर सुरेंद्र सिंह को सौंपी है। गुुरुवार को डीएम राजेश कुमार गोवर्धन पहुंचे और घटना की जानकारी ली। ग्रामीणों ने भी गोवर्धन पहुंचकर डीएम से मुलाकात की और ग्रामीणों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का विरोध किया। डीएम ने किसी भी निर्दोष को न फंसाए जाने का भरोसा दिया। साथ ही मृतक के परिवारीजनों की आर्थिक मदद दिलाने की बात कही। उन्होंने बताया कि सीएम के विवेकाधीन कोष से मदद के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया है।