मथुरा-वृंदावन में यमुना प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश भी कारगर साबित नहीं हो रहे। हाईकोर्ट में याची गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने कहा कि यमुना के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं पूरी हो रही हैं। मामले में नोडल अफसर ने गोवर्धन और मथुरा के ईओ से स्पष्टीकरण मांगा है।
जन्माष्टमी से पहले शुक्रवार को कलक्ट्रेट में आयोजित यमुना कार्य योजना की बैठक के दौरान गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्तर से औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाले पानी के नमूने नहीं लिए जा रहे हैं। मथुरा पालिका ने अब तक एसटीपी की सफाई नहीं की। रिवर पुलिस का कहीं पता नहीं।
दरेसी पर खुलेआम पशुकटान हो रहा है। याची ने साफ कहा कि उपरोक्त के संदर्भ में हाईकोर्ट के साफ दिशानिर्देश हैं। अफसर प्रत्येक बैठक में इन बिंदुओं पर अमल की बात भी कहते हैं, परंतु करते नहीं हैं।
इस पर नोडल अधिकारी रवींद्र कुमार ने औद्योगिक इकाई और एसटीपी की रिपोर्ट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से साप्ताहिक रिपोर्ट मांगी है। एसटीपी की सफाई न कराने के लिए ईओ मथुरा से स्पष्टीकरण देने को कहा है। अनुपस्थित ईओ गोवर्धन से भी स्पष्टीकरण मांग लिया है।
एलपीजी से चलेगा शवदागृह
एमवीडीए ने विद्युत शवदाहगृह के स्थान पर एलपीजी से संचालित शवदागृह बनाने का प्रस्ताव दिया है। इस पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च का आंकलन किया है, जो विद्युत शवदागृह के निर्माण पर आने वाली लागत से कम है।