छाता। छाता शुगर मिल को पुनः चालू कराने और प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट के विरोध में पूर्व सैनिकों व किसानों द्वारा चलाया जा रहा धरना व्यापक जनांदोलन का रूप ले चुका है। रविवार को छाता छत्र वन धाम के बैनर तले सभी 36 बिरादरियों के लोग, व्यापारी, मजदूर और बड़ी संख्या में मातृशक्ति प्रसिद्ध बिहारी जी मंदिर परिसर में एकत्र हुए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रांतिकारी संत स्वामी सच्चिदानंद महाराज और छाता की क्षेत्रीय सरदारी के नेतृत्व में यहां से एक विशाल एकता मार्च निकाला गया।
यह मार्च शुगर मिल स्थित धरना स्थल पर पहुंचा। पैदल मार्च के दौरान कस्बे में अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। इसके बाद गांव बिखरारी, खैरार किसान पहुंचे। जगह-जगह कस्बा वासियों ने आंदोलनकारियों पर पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया। स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने कहा, दो दिन पूर्व धरने को आघात पहुंचाने की नीयत से मुझ पर हमला किया गया था। उस पूरे षड्यंत्र के बावजूद मैं मंच छोड़कर केवल इसलिए हट गया ताकि आंदोलन की मर्यादा और शांति भंग न हो। लेकिन आज मैं सत्ता के मद में चूर तानाशाहों से कहना चाहता हूं कि आपकी तानाशाही अब ज्यादा दिन नहीं चलेगी। हमारे किसान और जवानों की इस अभेद्य एकता को कोई नहीं तोड़ सकता।
इस दौरान पूर्व चेयरमैन राजपाल सिंह उर्फ झब्बो, जगपाल चौधरी, दिगंबर चौधरी, भोला मेंबर, अमर सिंह और पदम फौजी सहित कई प्रमुख वक्ताओं ने अपने विचार रखे। दिनभर चले इस शक्ति प्रदर्शन के दौरान पूरा धरना परिसर और आसपास का क्षेत्र जय जवान, जय किसान के गगनभेदी नारों से गूंजता रहा। इस दौरान कर्मयोगी ललित कुमार सूबेदार, किशन सिंह आर्य, जबर सिंह प्रधान,जसवंत प्रधान, बाबा गोपाल दास, त्रिलोकी मेंबर समेत किसान और महिलाएं मौजूद रहीं।