शहर में घनी आबादी के बीच संचालित हो रही एक दर्जन से ज्यादा औद्योगिक इकाई पर पुलिस बल के साथ प्रशासनिक अफसरों ने छापेमारी की। इसमें आठ प्लांट के संचालक पुलिस बल को देख भाग गए। सिर्फ पांच से ही नमूने लिए जा सके हैं। इनकी स्थिति भी प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का मखौल उड़ाती मिली है।
एनजीटी के स्तर से नोटिस मिलने के बाद प्रशासनिक अफसर शहर में संचालित हो रही औद्योगिक इकाईयों की जांच में जुट गए हैं। शुक्रवार को मिली नाकामी के बाद शनिवार को एक बार फिर सिटी मजिस्ट्रेेट रामअरज यादव, एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी और प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी पुलिस बल के साथ चौक बाजार क्षेत्र में पहुंच गए। यहां आसपास की गलियों में संचालित हो रहे चांदी की पॉलिश से जुड़ी औद्योगिक इकाईयों का निरीक्षण किया। पांच इकाईयों से निकल रहे पानी के नमूने लिए गए।
इन इकाईयों के एसटीपी की हालत देखकर प्रतीत हो रहा था कि आनन-फानन में निरीक्षण की भनक के बाद इन्हें चालू किया गया है। बाकी आठ प्लांट पर ताले लटके मिले हैं। इसमें तेलीपाड़ा स्थित वशीम निकिल प्लांट का संचालक पुलिस को देखकर भाग गया। यहां अवैध रूप से तेजाब बेचने की भी सूचना मिली थी।
निरीक्षण में अफसर और पुलिस बल को देख इकाईयों से जुडे़ लोगों में खलबली मची रही। गत दिवस भी यही हाल था, संचालक प्लांट बंद करके गायब हो गए थे। अब सिटी मजिस्ट्रेट एनजीटी से प्राप्त नोटिस के आधार पर शहर और आसपास चल रही इकाईयों को ढूंढते घूम रहे हैं।
संदेह के घेरे में प्रदूषण अधिकारी
हाईकोर्ट के आदेशानुसार प्रत्येक 15 दिन बाद चांदी, निकिल से जुडे़ प्लांटों का निरीक्षण जरूरी है। लेकिन, कार्यालय में ही बैठकर यह कार्रवाई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसर अब तक करते रहे हैं। यही कारण है कि अब हकीकत जानने जब अफसर मौके पर पहुंच रहे हैं तो संचालक ताले डालकर भाग जा रहे हैं। इन अफसरों की मिलीभगत से इन प्लांटों से निकलने वाले जहर ने यमुना को जहरीला कर दिया है।