अब कंप्यूटर से तय किया जाएगा कि इस माह जिले के किन-किन मेडिकल स्टोर की जांच की जानी है। प्रदेश मुख्यालय पर हर माह जिले की दस दुकानों का चयन कर सूची गोपनीय तरीके से जिलों में तैनात औषधि निरीक्षकों को भेजी जाएगी।
कहा जा रहा है कि इस रेंडम सिस्टम से दुकानों के चयन के बाद स्टोरों के निरीक्षण, सैंपल देने में आनाकानी या नेताजी की सिफारिश नहीं चल पाएगी। शासन से सूची मिलने के बाद औषधि निरीक्षक उन दुकानों का आकस्मिक निरीक्षण करेंगे, दवाआें के सैंपल लेंगे और जांच की रिपोर्ट शासन को भेज देंगे।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अपर आयुक्त प्रशासन राम अरज मौर्य की ओर से भेजे पत्र में हिदायत दी गई है कि जिन दस मेडिकल स्टोरों की सूची शासन से जाए उसे प्राथमिकता के आधार पर जांच कर आख्या प्रस्तुत की जाए। औषधि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 300 थोक दवा विक्रेता और एक हजार फुटकर दवा विक्रेता हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में देहात अंचल में बिना लाइसेंस के ही दुकानों का संचालन किया जा रहा है।