मथुरा। कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाले छठ पर्व को लेकर मथुरा में तैयारियां शुरू हो गई हैं। पूर्वांचल क्षेत्र के लोगों की बढ़ती संख्या के चलते इस पर्व को लेकर उत्साह देखते बन रहा है। इस चार दिवसीय पर्व की शुरूआत गुरुवार से होने जा रही है।
हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में शुमार छठ को लेकर साल दर साल मथुरा के लोगों में उत्साह बढ़ रहा है। एक अनुमान के मुताबिक यहां करीब 20 हजार परिवार पूर्वांचल से जुड़े हुए हैं। इसमें हजारों लोग इस पर्व को उत्साह के साथ मनाते हैं। उनके साथ स्थानीय लोगों का पर्व में शामिल होना छठ के के दौरान होने वाले आयोजनों को और रोचक बना देता है।
पिछले कई सालों से मथुरा में इस पर्व को आकर्षण का केंद्र बनाने वाले भारतीय सांस्कृतिक समाज ने तैयारियां शुरू कर दी है। मीडिया प्रभारी शशि भूषण दुबे बताते हैं कि मथुरा रिफाइनरी में पूर्वांचल से करीब 500 से अधिक परिवार हैं, जो इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं। इसके लिए टाउनशिप में तैयारियां शुरू हो गई हैं।
चार दिवसीय पर्व
- पहला दिन -31 अक्तूबर - नहाय खाय
छठ पूजा की शुरूआत पहले दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय खाय के साथ हो जाती है। इस दिन व्रत रखने वाले स्नान आदि कर नए वस्त्र धारण करते हैं। शाकाहारी भोजन करते हैं। सामूहिक भोजन की परंपरा है।
-दूसरा दिन-01 नवंबर - खरना
छठ पूजा के दूसरे दिन कार्तिक शुक्ल पंचमी को व्रत रखा जाता है। इस दिन शाम के समय एक बार भोजन ग्रहण करने का प्रावधान है। इसे खरना कहा जाता है। इस दिन निर्जला व्रत रखते हैं। शाम को चावल व गुड़ की खीर बनाकर खाई जाती है।
तीसरा दिन-02 नवंबर - सायंकालीन अर्घ्य
छठ पूजा के तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भी निर्जला व्रत रखा जाता है। छठ पूजा का प्रसाद तैयार करते हैं। इस दिन व्रती शाम के समय किसी नदी, तालाब पर जाकर पानी में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं। और रात भर जागरण किया जाता है।
-चौथा दिन-03 नवंबर - प्रात:कालीन अर्घ्य
छठ पूजा के चौथे दिन कार्तिक शुक्ल सप्तमी की सुबह भी पानी में खड़े होकर उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। परिक्रमा भी करते हैं। इसके बाद एक दूसरे को प्रसाद देकर व्रत खोला जाता है।