गोवर्धन से पांच किमी दूर गांव मुखराई में शनिवार को विश्व प्रसिद्ध चरकुला नृत्य का आयोजन किया गया। देश-विदेश के हजारों लोगों ने इसका आनंद लिया। इसके बाद कलाकारों ने मयूर नृत्य और फूलों की होली का आनंद लिया। रात में धर्मपाल के निर्देशन में नौटंकी का आयोजन किया गया।
गांव मुखराई में श्रीराधारानी की ननिहाल है। श्रीराधारानी की नानी मुखरा देवी के नाम पर पडे़ गांव के नाम के पीछे मान्यता है कि धेवती के जन्म की खुशी में मुखरा देवी ने बैलगाड़ी के पहिए पर दीपक जलाए और नृत्य किया। उसी परंपरा के अंतर्गत होली के बाद चैत्रवदी दूज को गांव मुखराई में ब्राह्मण परिवार की महिलाएं अपने सिर पर सवा मन का पहिया रखकर चारों तरफ दीपक जलाकर चरकुला चौक पर नृत्य करती हैं।
मान्यता है कि चरकुला नृत्य करने वाली महिला सर्वप्रथम प्राचीन मंदिर बिहारीजी के सामने नृत्य के बाद गांव के बाहर बने भूमिया के चबूतरे पर प्रणाम कर चरकुला चौक में आकर नृत्य करती है। इस दौरान नगाड़े बजाए जाते हैं और इसकी धुन पर गाया जाता है ‘गिरवर ते डोर लगाय लीजौ, जब आवै गोवर्धन’। कार्यक्रम में गांव प्रधान मानपाल सिंह, पुरुषोत्तम शर्मा, हरिकिशन शर्मा, कांता प्रसाद, योगेश शर्मा, छीतरमल, पवन शर्मा आदि का सहयोग रहा। एडीएम प्रशासन धीरेंद्र सचान, एसडीएम सदर राजेश कुमार आदि मौजूद रहे।