जवाहर बाग हिंसा में इस्तेमाल हुए कारतूस कब्जाधारियों को लाइसेंस प्राप्त शस्त्रधारकों ने उपलब्ध कराया था। चंदनबोस और राकेश गुप्ता ने उनसे कारतूसों की खरीद की थी। पुलिस पूछताछ में इसका खुलासा हुआ है। कुछ शस्त्रधारकों के बारे में जांच एजेंसियों को पता भी चला है। वहीं कुछ शस्त्र विक्रेता भी पुलिस की जांच के दायरे में आ रहे हैं।
मथुरा के जवाहर बाग में 2 जून को हुई हिंसा में दो पुलिस अधिकारियों समेत 29 लोगों की मौत हो गई थी। कई पुलिसकर्मी गोली लगने से घायल भी हुए। करीब एक घंटे तक फायरिंग हुई थी। पुलिस ने जवाहर बाग की चेकिंग कराई थी तब वहां भारी मात्रा में अवैध असलहा और कारतूस बरामद हुए थे।
पुलिस पूछताछ में चंदनबोस और राकेश गुप्ता ने बताया कि वह शस्त्र लाइसेंस धारकों से कारतूस खरीद लेते थे। अपने परिचितों से भी इन लोगों ने कारतूस लेने की बात कही है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस को जो जानकारी इन लोगों से मिली है उसके मुताबिक कारतूस बदायूं, बरेली, लखीमपुर खीरी, कन्नौज, झांसी, बलरामपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, कानपुर, गोरखपुर समेत यूपी के कई जिलों से जवाहर बाग के कब्जाधारियों के लिए कारतूस खरीदे गए। बिहार और झारखंड से भी कारतूस खरीदने की बात सामने आ रही है। एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि इन सभी बिंदुओं को भी जांच में शामिल किया गया है। जिसने भी कारतूस बेचा होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।
दुकानदारों ने बगैर खोखे लिए ही बेचे कारतूस
शासन ने नियम बना दिया है कि अगर कोई शस्त्र लाइसेंस धारक अपने कोटे के कारतूस लेने के लिए आता है तो उसे पूर्व में खरीदे कारतूसों का ब्यौरा देना होगा। जितने कारतूस पहले लेकर गया था, उसके खोखे दिखाने होंगे। लेकिन अब बगैर खोखे जमा कराए कारतूस बेच दिए गए।
66 तमंचे और 10 बंदूकों से हुई पुलिस पर फायरिंग
पुलिस ने जवाहर बाग से 66 तमंचे और 10 बंदूकें बरामद की थीं। इनमें एक राइफल भी थी। पुलिस ने मौके से कारतूस भी बरामद किए थे। 315 बोर के 67 कारतूस थे। जबकि इस बोर के 169 खोखे थे। 12 बोर के भी 20 कारतूस थे। इन कारतूसों की खरीद रामवृक्ष के लोगों ने कई जिलों में जाकर की थी। अगर एक कारतूस 90 रुपये का था उसे 150 रुपये तक में खरीदा गया है। क्योंकि राकेश गुप्ता पर दो लाइसेंसी असलहा थे, लिहाजा उसने अपने लाइसेंस पर कारतूस खरीदें।