मथुरा। तीन दिन की मियाद पूरी होने के बाद सोमवार को रेलवे प्रशासन ने पुलिस के सहयोग से नई बस्ती में फिर से बुलडोजर दौड़ाए। दिनभर में शेष बचे 75 मकानों को ध्वस्त कर दिया। हालांकि इनमें रह रहे लोग अपना सामान पहले ही ले जा चुके थे। इससे पहले गत बुधवार को 60 मकानों को ध्वस्त किया गया था।
मथुरा-वृंदावन के बीच मीटर गेज रेलवे लाइन को ब्रॉडगेज में परिवर्तित करने में नई बस्ती बाधक बन रही थी। रेलवे का दावा है कि नई बस्ती उनकी जमीन पर बसी है। मामला हाईकोर्ट से रेलवे संपदा अधिकारी की कोर्ट में पहुंचा। बस्तीवासियों की अपील खारिज होने के बाद रेलवे ने स्वत: अतिक्रमण हटाने को एक महीना दिया था, इसके बावजूद बस्तीवासियों ने इसकी अनदेखी की। गत बुधवार को रेलवे ने नई बस्ती में अवैध कब्जों को हटाने के लिए ध्वस्तीकरण अभियान चलाकर 60 घरों को ध्वस्त कर दिया और शेष अतिक्रमणकारियों को तीन दिन में स्वत: अतिक्रमण हटा लेने की चेतावनी दी।
इनमें से कुछ ने तो अपने कब्जे हटाने शुरू कर दिए, लेकिन कुछ लोग ऐसे थे, जिन्होंने अपने मकानों को नहीं तोड़ा। सोमवार सुबह करीब 10.30 बजे रेलवे अधिकारियों ने फिर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की और शाम तक शेष 75 मकानों को मलबे में तब्दील कर दिया। रेलवे आगरा मंडल की पीआरओ प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि नई बस्ती में रेलवे द्वारा 135 अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे। सोमवार को 75 कब्जों को ध्वस्त कर दिया गया है।
एसडीएम ने मीडियाकर्मियों को कवरेज से रोका, फोटो डिलीट करवाए
नई बस्ती में सोमवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान एसडीएम सदर ने मीडियाकर्मियों को कवरेज करने से रोक दिया। श्रीकृष्ण जन्मस्थान रेलवे क्राॅसिंग और अमरनाथ स्कूल रेलवे क्राॅसिंग से आगे नई बस्ती की तरफ नहीं जाने दिया गया। एसडीएम और पुलिसकर्मियों ने मीडियाकर्मियों को फोटो भी नहीं खींचने दिए। इसके साथ ही मीडियाकर्मियों के खींचे गए फोटो कैमरे और मोबाइल फोन से डिलिट करा दिए। एसडीएम सदर ने इस बारे में बताया कि उनके पास सभी अधिकार हैं।