जिले के निजी स्कूलों में अभिभावकों को लूटने का खेल खुलेआम चल रहा है। इसके बाद भी प्रशासन अनजान बना हुआ है। एनसीईआरटी की किताबों का जो सेट बाजार में पांच सौ रुपये का मिल रहा है वही सेट निजी स्कूल में तीन से पांच हजार रुपये तक में बेचा जा रहा है। इससे अभिभावकाें की जेब पर बड़ी आर्थिक मार पड़ रही है।
स्कूल प्रबंधनों ने प्राईवेट पब्लिशर्स और बुक सेलर्स से कमीशन पर अनुबंध कर लिया है। सूत्रों के अनुसार प्राईवेट पब्लिशर्स और बुक सेलर्स के साथ स्कूल प्रबंधनों का 60 से 80 प्रतिशत तक कमीशन तय है। इसके चलते ही किताबों का रेट बढ़ जाता है। इस तरह की कई शिकायतें डीआईओएस ऑफिस तक पहुंची हैं।
एनसीईआरटी किताबें: कक्षा छह का लगभग 500, कक्षा नौ का लगभग 800 और कक्षा 11 की करीब 1200 रुपये में किताबों का सेट आ जाता है। निजी स्कूलों में कक्षा छह में तीन हजार से लेकर 5000 तक, कक्षा नौ का तीन हजार से छह हजार और कक्षा 11 में करीब पांच हजार से लेकर 8000 रुपये तक किताबों का सेट दिया जा रहा है।
डीआईओएस कार्यालय में निर्धारित बुक सेलर्स से ही पुस्तकें खरीदे जाने की बाध्यता जैसी कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इसके चलते शुक्रवार को ही कई विद्यालयों को नोटिस जारी किया गया है। इसमें स्पष्टीकरण मांगा गया है।
- डॉ. आईपी सिंह सोलंकी, जिला विद्यालय निरीक्षक
स्कूल वालों ने मचा रखी है लूट
शहर के स्कूल वालों ने लूट मचा रखी है। स्थिति यह है कि फीस में भी बेतहाशा इजाफा कर दिया गया है। पिछले साल यदि दो हजार रुपये फीस थी तो वह सीधे तीन हजार रुपये कर दी गई है। अभिभावक परेशान हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। प्रशासन भी खामोश है। अधिकारियों ने किसी स्कूल की चेकिंग नहीं की। बुकसेलर से हिसाब नहीं मांगा।