वृंदावन (मथुरा)। पीने के पानी में टीडीएस की अधिकता और खानपान में आए बदलाव से लोगों में प्रोटीन और कैल्शियम की कमी के कारण हड्डियां कमजोर हो रही हैं। गिरने और जरा सी चोट लग जाने पर हड्डी टूट रही हैं।
इतना नहीं घुटने और शरीर के जोड़ उठने-बैठने के दौरान आवाज कर रहे हैं, जोड़ों के बीच गैप हो रहा है। इस तरह के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिला संयुक्त चिकित्सालय में प्रतिदिन 200 से अधिक मरीज हड्डी संबंधी परेशानियां लेकर पहुंच रहे हैं।
जिला संयुक्त चिकित्सालय के हड्डी रोग विशेषज्ञ डाॅ. लखन सिंह तंवर ने बताया कि उनके पास अधिकतर मरीज कैल्शियम डिफिशिएंसी के मरीज आ रहे हैं। इसमें हड्डियां कमजोर हो जाने के कारण टूट जाती हैं। उसमें लोग उसे जोड़ने के लिए देशी नुस्खा अपनाते हुए गर्म सिकाई करने लगते हैं। जबकि चोट या हड्डी की शिकायत होने पर 48 घंटे बर्फ या ठंडी सिकाई करनी चाहिए। इसके अलावा कमर, घुटने का दर्द, रीड़, कूल्हे की हड्डी में कमजोरी के कारण दर्द और जोड़ों की समस्या के मरीज आ रहे हैं। हड्डी से जुड़ी इन सब बीमारियों के पीछे पानी में टीडीएस की अधिकता है।
अक्सर देखा जा रहा है कि टीडीएस 700 और इससे अधिक पाया जाता है, जबकि पीने के पानी में टीडीएस 125 और इससे कम होना चाहिए। इसके अलावा हड्डी की कमजोरी के लिए खानपान का सही न होना है। लोग कोल्ड ड्रिंक, खाने में नमक की अधिकता और फास्ट फूड खा रहे हैं। जो कि हड्डियों को कमजोर कर रहा है। डॉ. तंवर ने बताया कि ज्यादा नमक का सेवन करने से हड्डियों पर बुरा असर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि दूध में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन होता है, इसलिए नियमित रूप से दूध पीयें, सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों से शरीर में विटामिन डी बनता है, जो कि हड्डियों के लिए काफी फायदेमंद है। इसलिए रोजाना 15 मिनट धूप अवश्य लें। घुटनों में ग्लूकोसिन की मात्रा 150 ग्राम से कम हो जाने पर चलने पर घुटने आवाज करते हैं और धीरे-धीरे गैप हो जाता है। इस समस्या से बचने के लिए खाने में सलाह शामिल करना चाहिए। सलाद से ग्लूकोसिन बनता है।