बरसाना के मोरकुटी स्थल पर लीला का दृश्य
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राधाष्टमी जन्मोत्सव पर होने वाली 10 दिवसीय बूढ़ी लीलाओं में राधा जन्म के बाद शनिवार को ढांढी-ढांढन लीला की बरसाना में धूम मची रही। शनिवार को लाड़लीजी मंदिर में यह आयोजन किया गया। ढांढन ने ‘बाबा मैं तो बधाई लेने बरसाने जाऊंगी...’ गाकर बाबा वृषभान व मैया कीरत से बधाई मांगी और श्रीराधाजी को दीर्घायु होने का आशीर्वाद दिया।
श्रीराधारानी की भूमि बरसाना में राधाष्टमी के आयोजनों का दौर शनिवार को भी जारी रहा। परंपरागत तौर पर होने वाले आयोजनों में शनिवार को मोर कुटी पर मयूर लीला और शाम को राधा रानी मंदिर परिसर में ढांढी-ढांढन लीला का आयोजन किया गया। इस दौरान राधाजी को आशीष दिए तो बाबा और मैया ने जमकर उपहार लुटाए।
बता दें कि लाड़ली मंदिर में ढांढन के रूप में 51 वर्षीय अनुराग सखी 35 वर्षों से बधाई गायन कर रहे हैं। राधा जन्म उत्सव में गोटा और जरी से जड़ा लहंगा पहन, विभिन्न प्रकार के आभूषण और सोलह शृंगार कर संगीत की ध्वनियों के बीच लीला की गई। ‘बाबा मैं तो बधाई लेने बरसाने जाऊंगी..., बरसाने जन्मी श्रीराधा... आदि बधाई का गायन किया गया। यह सुनकर श्रोता आनंद में झूम उठे।
श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा मंदिर परिसर
लाड़लीजी मंदिर परिसर इस अद्भुत लीला को देखने वालों से देर रात तक खचाखच भरा रहा। मंदिर के सेवायत रासबिहारी गोस्वामी, मोनू शर्मा ने ढांढन को भेंट और ओढ़नी पहनाकर स्वागत किया।
मोर बन आयौ प्यारो मोर बन आयौ...
बरसाना के गहवरवन स्थित मोर कुटी पर परंपरागत रीति से बूढ़ी लीला महोत्सव के साथ रासलीलाओं का दौर शुरू हुआ। इस मौके पर मयूर लीला हुई। इसमें राधा प्यारी ने अपने प्रिय श्याम सुंदर से कहा कि हे प्रिये जो तुम मयूर नृत्य करते हो उसे मुझे सिखाओ। श्रीकृष्ण ने राधा रानी की इच्छा पर मयूर का रूप धारण किया और उन्हें मयूर नृत्य सिखाने लगे। इस पर राधा की सखियां कहने लगीं मोर बन आयौ प्यारो मोर बन आयौ। वृषभान नंदिनी उनके नृत्य को देख इतनी भाव-विभोर हो गईं कि वे नाचना-सीखने के बजाए उनको फल और लड्डू खिलाने लगीं। इस अद्भुत लीला को देख श्रद्धालु मयूर भगवान के जयकारे लगाने लगे।