चौधरी लक्ष्मीनारायण सिंह जाटलैंड में एक बार फिर भाजपा के ब्रांड बन गए हैं। राजनाथ सिंह और कल्याण सरकार में भी वह मंत्री रह चुके हैं। बसपा सरकार में तो उन पर कृषि मंत्रालय समेत कई प्रमुख विभाग रहे थे। अब योगी सरकार ने भी जाट बिरादरी को साधने के लिए उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पंद्रह से भी ज्यादा जनपदों में जाट बिरादरी निर्णायक भूमिका में है। आगरा, मथुरा, हाथरस, अलीगढ़, बुलंदशहर, बरेली, मुरादाबाद, अमरोहा, संभल, बिजनौर, मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, नोएडा और गाजियाबाद की तो सियासत भी इसी बिरादरी के इर्द-गिर्द घूमती है। मथुरा जनपद की पांचों विधानसभा क्षेत्र में जाट बहुतायत में हैं। इस बार सभी सीटों पर जाटों ने भाजपा के पक्ष में खुलकर वोट भी किया है। ये नतीजे तो उस वक्त के हैं जब जाट आरक्षण संघर्ष समिति जगह-जगह कार्यक्रम करके भाजपा का विरोध कर रही थी। लेकिन उनका दावा कहीं रंग दिखा नहीं सका।
छाता विधानसभा क्षेत्र से रिकार्ड मतों से जीते चौधरी लक्ष्मीनारायण को योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। इसके पीछे उनका मंत्री पद का लंबा अनुभव और जाट बिरादरी का चेहरा होना माना जा रहा है। सरकार ने लक्ष्मीनारायण को मंत्री बनाकर जाट बिरादरी को साधने की कोशिश की है। सियासी जानकारों का कहना है कि पहले मथुरा जनपद से केवल श्रीकांत शर्मा को ही मंत्री बनाने की योजना बन रही थी लेकिन बाद में मंत्रीमंडल गठन के लिए लगाए गए सियासी गुणाभाग में लक्ष्मीनारायण को भी स्थान दिया गया है। लक्ष्मीनारायण चौधरी राजनाथ सिंह और कल्याण सिंह की सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं। वर्ष 2007 में बसपा की सरकार में उनके पास कृषि मंत्रालय और प्राविधिक शिक्षा रही।
खूब चर्चा में रहे हैं लक्ष्मीनारायण
बसपा सरकार में कृषि मंत्री रहते हुए उन पर खूब आरोप लगे थे। मथुरा में ही मनरेगा का काम अपने किसी चहेते एनजीओ को दिलवाने का मामला लखनऊ तक गूंजा था। ढेंचा बीज घोटाले में भी उनका नाम खूब घसीटा गया था। हालांकि वह हर बार इन आरोपों को नकारते रहे थे। जमीन कब्जाने के आरोप भी मंत्री रहते हुए लगे थे। सूखा राहत के वितरण में भी धांधली के मामले सामने आए थे। विरोधी दलों ने उन पर जमकर आरोप लगाए थे। कृषि विभाग में नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठे थे। यहां तक कहा गया था कि उन्होंने अपने चहेतों को नौकरी दिलवाई है। एक मामले की जांच तो आर्थिक अपराध शाखा से भी करवाई गई थी।
पिता-स्व. रतिराम सरपंच
निवास-गांव सांचौली, छाता
शिक्षा-एमए, एलएलबी
पत्नी-ममता चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष
-साल 1985 में पहली बार विधायक चुने गए। तीन बार विधायक, दो बार यूपी में केबिनेट मंत्री रहे। चौथी बार निर्वाचित हुए।