यूपी में ट्रांसफार्मर खरीद में भी भारी अनियमितताएं बरती गईं। सरकार और बड़े अधिकारियों की चहेती कंपनियों से ऐसे ट्रांसफार्मर खरीद लिए गए जो मानकों पर खरे नहीं थे। कुछ ही दिन में जवाब दे गए थे। बावजूद इसके खराब क्वालिटी का ट्रासंफार्मर देने वाली कंपनियों से खरीद होती रही।
उत्तर प्रदेश में जयपुर, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, लखनऊ, गाजियाबाद, कानपुर, रामपुर और सोनीपत की कंपनियों से ट्रांसफार्मर की खरीद की गई है। 10 केवी से लेकर 400 केवी तक ट्रांसफार्मर खरीदे गए। पिछले दो वर्षों में ही बिजली विभाग ने करीब 50 हजार ट्रांसफार्मर खरीदे थे। इनमें मानकों का ध्यान नहीं रखा गया। 250 केवीए और 100 केवीए के आठ हजार ट्रांसफार्मर कुछ ही दिनों में जवाब दे गए। विभाग ने इन ट्रांसफार्मरों को कंपनी से बदलना मुनासिब नहीं समझा।
जबकि जीटीपी (गारंटी टर्म एंड पर्टीकुलर) के आधार पर 36 महीने से पहले कोई ट्रांसफार्मर खराब हो जाता है तो कंपनी उसे बदलती है। बताया जाता है कि बिजली विभाग ने उन कंपनियों से ट्रांसफार्मर खरीदे थे जो सरकार और मंत्रियों की गुडबुक वाली थीं। बिजली विभाग के आला अफसर भी इस पूरे खेल में शामिल माने जा रहे हैं। वैसे तो ट्रांसफार्मर खरीद के लिए विभाग की पर्चेज कमेटी होती है जो संबंधित फैक्ट्री में जाकर ट्रांसफार्मर की क्वालिटी को चेक करती है। लेकिन इस कमेटी ने भी केवल औपचारिकता ही निभाई है।
ऐसे हुई गड़बड़ी
क्वालिटी कंट्रोल कमेटी ने दफ्तर में बैठकर लगाई रिपोर्ट
वाइंडिंग नियमानुसार नहीं की गई
वाइंडिंग की कमी के कारण ट्रांसफारमर फुंके
ट्रांसफर्मर में तार भी कम लगाया गया
कंपनियों से फिक्स था कमीशन
ट्रांसफार्मर खरीद में कमीशन का भी खेल चलता है। बिजली विभाग को ट्रांसफार्मर बेचने वाली कंपनियां उनका पूरा ख्याल रखती हैं। इस प्रकार के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। लेकिन यह आरोप केवल आरोप बनकर रह जाते थे। मामला कभी जांच तक नहीं पहुंच पाया।
शिकायतें मिली हैं, जांच कराएंगे : उर्जा मंत्री
प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और बिजली मंत्री श्रीकांत शर्मा का कहना है कि ट्रांसफारमर खरीद में अनियमितताओं की शिकायतें मिली हैं। एक कमेटी बनाकर जांच कराई जाएगी। जो भी ट्रांसफारमर विभाग के पास हैं उनकी क्वालिटी का भी परीक्षण कराया जाएगा। इसके लिए इंजीनियरों से रिपोर्ट मांगी जा रही है।