जन जन के आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी महाराज को आखिरकार मंगलवार को कच्चे प्रसाद का भोग लगाया गया। मंदिर प्रबंध कमेटी के आग्रह पर तीन सेवायतों ने ठाकुरजी को यह भोग अर्पित किया। करीब एक सप्ताह से सब के लाड़ले ठाकुर बांकेबिहारी पक्का प्रसाद ही भोग के रूप में प्राप्त कर रहे थे।
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के प्रबंधक प्रशासन उमेश सारस्वत ने बताया कि बीते दिनों मंदिर प्रबंधन के आग्रह पर सेवायत सरस बिहारी गोस्वामी, राजुल गोस्वामी और पुनीत गोस्वामी ने ठाकुरजी की कच्ची रसोई बनाने का प्रस्ताव मंदिर प्रबंधन के समक्ष भेजा था। इस मंदिर प्रबंधन ने स्वीकृति प्रदान कर दी। मंगलवार को इन्हीं तीनों सेवायतों ने ठाकुरजी की कच्च्ी रसोई तैयार की।
बता दें कि लगभग एक सप्ताह पहले मंदिर सेवायत के कच्ची रसोई बनाने से मना करने पर मंदिर प्रबंधन ने सारस्वत भंडारी से कच्ची रसोई का निर्माण कराया था। इसका मंदिर के सेवायत गोस्वामियों ने विरोध जताया और मंदिर प्रबंधन पर मंदिर की प्राचीन परंपरा तोड़ने का आरोप लगाया था।
ठाकुरजी की रसोई भी है खास
ठाकुर बांकेबिहारी महाराज ब्रज के लाड़ले हैं। इसलिए बाल रूप आराध्य को रिझाने के प्रयास कई तरह से किए जाते हैं। इसी का एक हिस्सा है ठाकुरजी को लगने वाला भोग।
मंदिर के सेवायत ब्रज किशोर गोस्वामी ने बताया कि ठाकुरजी की कच्ची रसोई में सादा चावल, मीठे चावल, नमकीन चावल, दाल, कढ़ी, खीर, उद्होटा, फुल्के, मिस्सी रोटी, कई प्रकार की हरी सूखी सब्जी, आलू की रसभरी सब्जी, दाल, दहीबड़ा, रायता, पराठा, अचार, पापड़ और कई प्रकार की मिठाई के साथ ठाकुरजी का प्रिय दूधभात आदि व्यंजन तैयार होते हैं।
इन्हीं का भोग लगाया जाता है। पक्के प्रसाद में पूरी-कचौड़ी, समोसा, मठरी, कई प्रकार की मिठाई, पकौड़ी, दही, हरी सब्जी, आलू की सब्जी और दूधभात का भोग लगाया जाता है।