परे भूमि नहिं उठत उठाए।
बर करि कृपा सिंधु उर लाए॥
स्यामल गात रोम भए ठाढ़े।
नव राजीव नयन जल बाढ़े॥
श्रीरामलीला सभा के तत्वावधान में चौक बाजार में भरत मिलाप लीला का आयोजन किया गया। वन से लौटे भाई प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण और माता जानकी के दर्शन के लिए भरत और शत्रुघ्न आते हैं। उनकी आंखें राह पर टिकी रही। जैसे ही प्रभु के दर्शन हुए आंखें सजल हो गई। रघुनंदन ने भाइयों को गले लगा कुशलक्षेम पूछीं।
आततायी रावण का अंत करने के बाद प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, हनुमान रथ पर सवार हो चित्रकूट से आए, वही प्रभु श्रीराम के आगमन का समाचार सुन भरतजी की सवारी विकास बाजार, तिलकद्वार, द्वरकाधीश, होते हुए चौक बाजार पहुंची। यहां पर श्रीराम, लक्ष्मण का अपने अनुजों भरत-शत्रुघभन से मिलाप हुआ।
इस मौके पर गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, रामगोपाल शर्मा, संजय शर्मा, शैलू हकीम, नारायण हरि गुप्ता, प्रचार मंत्री नरेंद्र दरबै वाले आदि उपस्थित थे। मीडिया प्रभारी विपुल पारिक के अनुसार 13 अक्तूबर को श्रीकृष्ण जन्मस्थान के मंच पर श्रीराम राज्य तिलक की लीला होगी।