वृंदावन। श्रौतमुनि आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा प्रवक्ता अनिरुद्धाचार्य ने भागवत पुराण के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे भारतीय वाङ्मय का मुकुटमणि बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह ग्रंथ मुख्य रूप से भागवत पुराण है, जिसका अर्थ है भागवतों का पुराण। इसमें स्वयं भगवान से भी अधिक उनके भक्तों की महिमा का वर्णन किया गया है। स्वयं भगवान ने अपने श्रीमुख से भक्तों की महिमा कही है, इसलिए यह भगवता प्रोक्तं से भी भागवतम् कहलाता है। यह भगवान के द्वारा कहा गया, भक्तों की महिमा-रूप श्रीमद्भागवत है।
इस दौरान श्रीमद्भागवतजी एवं कथा व्यास का पूजन महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद महाराज, स्वामी वेदानंद महाराज, स्वामी अद्वैतमुनि, स्वामी देवादास, सुभाष अग्रवाला, और सुभद्रा अग्रवाला ने किया। इस अवसर पर स्वामी प्रकाश मुनि महाराज, स्वामी देवादास महाराज, स्वामी भरत मुनि, स्वामी अद्वैतमुनि महाराज, स्वामी निर्मल दास महाराज, स्वामी श्यामानंद, गुरुदास, स्वामी परमानंद सरस्वती, महादेव बापू, स्वामी राम मुनि आदि मौजूद रहे। संवाद