फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हर साल 45 करोड़ का कारोबार: इस जिले के किसानों की बदली किस्मत, मोटी कमाई का ऐसा नुस्खा; बेरोजगार जरूर पढ़ें

Mon, 19 Oct 2026 01:34 PM IST
Dhirendra Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

मधुमक्खियों को मौसम और फूलों के अनुसार बंगाल से कश्मीर तक ले जाकर किसान 10 से अधिक वैरायटी का शहद तैयार करते हैं। सरसों के शहद की यूरोपीय देशों में मांग के बीच उद्यान विभाग स्थानीय किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की तैयारी कर रहा है।
 
विज्ञापन
मधुमक्खी पालन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मधुमक्खी पालन कर अपनी आजीविका चला रहे जनपद के कई किसान 10 से अधिक स्वाद के शहद को तैयार कर रहे हैं। अलग-अलग वैरायटी का शहद तैयार करने के लिए वे पश्चिमी बंगाल के 24 परगना जिले से लेकर दक्षिणी जम्मू कश्मीर के अनंतनाग, कुलगाम, पुलवामा और शोपियां जिलों में इन मक्खियों को लेकर जाते हैं। जिले में वर्षभर में लगभग 150 टन शहद का उत्पादन किया जाता है। इससे मधुमक्खी पालकों को 40 से 45 करोड़ रुपये की आमदनी हो रही है।
विज्ञापन


 
Trending Videos

जनपद में उद्यान विभाग की मदद से 35-40 किसान मधुमक्खी पालन के काम में जुटे हुए हैं। पिछले 24 वर्ष से इस कार्य को कर रहे किसान डॉ. बीनू रावत ने बताया कि वर्ष 2003 से 10 बक्सों के साथ इस काम को शुरू किया था। समय बदलता नई-नई जानकारी मिलीं तो कारोबार बढ़ता चला गया। मधुमक्खियों को समय और सीजन के अनुसार लाते हैं। इसमें पश्चिम बंगाल के 24 परगना, सुंदरवन, बिहार के मुजफ्फरपुर, नैनीताल, मप्र के शिवपुरी, आगरा, मथुरा और जम्मू कश्मीर के दक्षिणी जिलों से मधुमक्खी लेकर जाते हैं। हालांकि इसमें उनका काफी पैसा खर्च हो जाता है। 



 

इन वैराइटी के शहद होते हैं तैयार
रावत बताते हैं कि मधुमक्खियों की देखभाल और माइग्रेशन करने से वे लीची, जामुन, अजवाइन, सौंफ, बबूल, बेरी, सरसों, नीलगिरी, शीशम, मल्टीफ्लोरा और कश्मीरी अकेशिया आदि वैराइटी के शहद तैयार करते हैं। शहद उत्पादन के लिए उन्हें लखनऊ में प्रादेशिक फल, शाक, भाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी में प्रथम पुरस्कार मिला है। इस समय उनके पास 1500 से अधिक बॉक्स हैं, जिनसे हर साल उन्हें 45-50 टन शहद का उत्पादन करते हैं। उनकी पत्नी पूजा रावत भी माल की पैकिंग और बिक्री के काम में हाथ बंटातीं हैं।

 

 जिला उद्यान अधिकारी डॉ. प्रशांत कुमार सिंह का कहना है कि सरसों के फूलों से तैयार होने वाले शहद की यूरोपियन यूनियन के देशों में 75 प्रतिशत तक मांग है। स्थानीय किसानों के शहद को एपीडा के माध्यम से अंतराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जाएगा।
विज्ञापन

डॉ. बीनू कुमार रावत ने बताया कि जिला उद्यान विभाग के मार्गदर्शन के बिना यह काम संभव नहीं था। विभाग के द्वारा समय-समय पर दिलाए गए प्रशिक्षण ने इस काम को गति दे पा रहे हैं। सरकार कीटनाशक दवाओं पर रोक लगाए तभी यह उत्पादन बड़ा रूप ले सकेगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें