जनपद में उद्यान विभाग की मदद से 35-40 किसान मधुमक्खी पालन के काम में जुटे हुए हैं। पिछले 24 वर्ष से इस कार्य को कर रहे किसान डॉ. बीनू रावत ने बताया कि वर्ष 2003 से 10 बक्सों के साथ इस काम को शुरू किया था। समय बदलता नई-नई जानकारी मिलीं तो कारोबार बढ़ता चला गया। मधुमक्खियों को समय और सीजन के अनुसार लाते हैं। इसमें पश्चिम बंगाल के 24 परगना, सुंदरवन, बिहार के मुजफ्फरपुर, नैनीताल, मप्र के शिवपुरी, आगरा, मथुरा और जम्मू कश्मीर के दक्षिणी जिलों से मधुमक्खी लेकर जाते हैं। हालांकि इसमें उनका काफी पैसा खर्च हो जाता है।
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. प्रशांत कुमार सिंह का कहना है कि सरसों के फूलों से तैयार होने वाले शहद की यूरोपियन यूनियन के देशों में 75 प्रतिशत तक मांग है। स्थानीय किसानों के शहद को एपीडा के माध्यम से अंतराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जाएगा।
डॉ. बीनू कुमार रावत ने बताया कि जिला उद्यान विभाग के मार्गदर्शन के बिना यह काम संभव नहीं था। विभाग के द्वारा समय-समय पर दिलाए गए प्रशिक्षण ने इस काम को गति दे पा रहे हैं। सरकार कीटनाशक दवाओं पर रोक लगाए तभी यह उत्पादन बड़ा रूप ले सकेगा।