बरसाना। अभी लाठियां शांत हैं, ढालें दीवारों से टिकी हैं, लेकिन राधा रानी की नगरी का कण-कण बता रहा है कि नंदगांव के हुरियारे आने को तैयार हैं। चौक चौराहों पर सुर साधे जा रहे हैं, तो गलियों में चौपाइयों की तान उठ रही है। हर मोहल्ला अपने हिस्से का आतिथ्य निभाने को सजा खड़ा है। लठामार से पहले बरसाना का असली वैभव उसके स्वागत संस्कार में दिखता है, जहां चुनौती से पहले मान दिया जाता है और लाठी से पहले पद गूंजते हैं।
कस्बे की सुबह इन दिनों सामान्य नहीं होती। जैसे ही धूप दीवारों पर चढ़ती है, चौपालों पर बैठकें शुरू हो जाती हैं। बुजुर्ग चौपाइयों के पदों की शुद्धता पर चर्चा करते हैं तो युवा उसी ठसक और लय में स्वर साधते नजर आते हैं। लठामार होली में हुरियारिन बनने का सौभाग्य भले ही ब्राह्मण समाज की महिलाओं को मिलता हो, लेकिन तैयारी पूरे बरसाने की होती है। व्यापारी अपनी दुकानों के बाहर सजावट में लगे हैं, घरों में मेहमानों के स्वागत की तैयारी है।
होली के दिन प्रत्येक मोहल्ले से चौपाई निकलेगी। पद गायन और नृत्य के साथ टोलियां गुजरेंगी और वातावरण को फाग के रंग में डुबो देंगी। नंदगांव से आने वाले हुरियारों का पहला पड़ाव प्रिया कुंड होगा। यहां उन्हें भांग और ठंडाई अर्पित कर सम्मान दिया जाएगा। इसके बाद हुरियारे पदों की स्वर लहरियों और अबीर गुलाल की रंगधार के बीच श्रीजी मंदिर की ओर बढ़ेंगे। मंदिर प्रांगण में गीतों की गूंज और नृत्य के साथ उत्सव चरम पकड़ेगा।