संगीत सम्राट स्वामी हरिदासजी के लाडले ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज का प्राकट्योत्सव धर्मनगरी में धूमधाम से मनाया गया।
बुधवार को बिहार पंचमी के अवसर पर पूरा नगर ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के रंग में रंगा नजर आ रहा था। निधिवनराज मंदिर और ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में सुबह पूजा अर्चना से शुरू हुए कार्यक्रम देर शाम तक भजन संकीर्तन के साथ जारी रहे।
निधिवनराज मंदिर में अल सुबह से ही पूजा अर्चना का क्रम आरंभ हो गया था। पांच बजे सेवायत भिक्की गोस्वामी और श्रद्धालुओं ने ठाकुरजी की प्राकट्य स्थली का पंचामृत से महाभिषेक किया।
इस दौरान मंदिर स्वामी हरिदासजी और बांकेबिहारी महाराज के गगनभेदी जयकारों से गूंज रहा था। बधाई गायन के दौरा श्रद्धालु माई री सजह जोरी प्रकट भई... आदि भजनों पर झूमते रहे।
सुबह 8.30 बजे श्रीनिधिवनराज मंदिर से बधाई शोभायात्रा निकाली गई। यह यात्रा नगर के विभिन्न मार्गाें से होती हुई दोपहर में लगभग एक बजे बांकेबिहारी मंदिर पहुंची। यहां सुबह सात बजे पूजन आरंभ हो गया था।
सेवायताें ने पहले घी, शहद, बूरा, दूध और दही और गुलाब जल से ठाकुर बांकेबिहारी महाराज का अभिषेक किया। इसके बाद उन्हें स्वर्ण-रजत पोशाक धारण कराई गई।
विशेष पोशाक में ठाकुरजी की बांकी छवि को भक्त अपलक निहारते रहे। भव्य फूलों की सजावट और रंग-बिरंगे गुब्बारे मंदिर की शोभा बढ़ा रहे थे। प्रांगण में गुलाब, हिना और केसर के इत्र की खुशबू मन को आनंदित कर रही थी।
शोभायात्रा के मंदिर पहुंचने के बाद ठाकुरजी की आरती हुई और भक्तों को पंचामृत बांटा गया। शाम को निधिवनराज मंदिर में स्वामी हरिदासजी की महाआरती का आयोजन हुआ।
शोभायात्रा का आकर्षण बना डांडिया
वृंदावन। निधिवनराज मंदिर से आरंभ हुई ठाकुर बांकेबिहारी महाराज की शोभायात्रा में सबसे आगे भगवान गणेश, राधा कृृष्ण के साथ बांके बिहारी महाराज की मनोरम झांकी शामिल थी। मुख्य डोले में संगीत शिरामणि स्वामी हरिदासजी बिहारीजी को गोद में लिए थे।
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत और संतगण अपने अखाड़ों के चिन्ह लेकर साथ थे। भक्तों की मंडली नृत्य और कीर्तन करते हुुए चल रहीं थीं। हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान आदि राज्यों से आईं महिलाओं और युवतियों का डांडिया नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा।