मथुरा। इसी इमारत में पीड़िताओं के रहने की व्यवस्था की जाएगी।
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गौतबुद्धनगर के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मथुरा दूसरा राजकीय बाल गृह बालिका केंद्र होगा। वर्तमान में ऐसी पीड़िताओं को गौतमबुद्धनगर या प्रदेश के अन्य केंद्रों पर भेजा जाता था, लेकिन अब यह आराध्य की गोद में ही रहेंगी।
अधिकारियों के मुताबिक, वृंदावन में राजकीय बाल गृह बालिका केंद्र बनाने की शासन से स्वीकृति मिल गई है। इसे वृंदावन के चैतन्य विहार में स्थित विधवा आश्रम के भवन में बनाया जाएगा। यह केंद्र दो सौ बालिकाओं की क्षमता वाला होगा। इसमें अनाथ, यौन उत्पीड़न से प्रताड़ित या फिर अन्य परेशानी के कारण परिवार के साथ रहने से मना करने वाली बालिकाओं को आश्रय दिया जाएगा।
वर्तमान में बेघर बालिकाओं को छोड़कर ऐसी पीड़िताओं को वन स्टाॅप सेंटर में रखा जाता है, लेकिन यहां सिर्फ पांच दिन तक रहने का नियम है। अगर कोई पीड़िता अपने परिजन के साथ जाने से मना करती है तो वह अधिकारियों के लिए परेशानी बन जाती है। साथ ही उसकी सुरक्षा और देखभाल करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी हो जाता है। इसलिए अधिकारियों ने राजकीय बाल गृह बालिका केंद्र बनाने की योजना बनाई है।
प्रस्ताव पर शासन से मंजूरी मिल गई है। अब अधिकारी भवन को व्यवस्थित करने में जुटे हैं। इसमें बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ बालिकाओं की सुरक्षा भी कड़ी होगी। इसके लिए सीसीटीवी कैमरों सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को लगाया जाएगा। साथ ही 24 घंटे सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे।
मथुरा के बाद मुरादाबाद बनेगा तीसरा केंद्र
अधिकारियों का कहना है कि इस केंद्र में एक साथ दो सौ बालिकाओं के ठहरने की व्यवस्था होगी। गौतमबुद्धनगर के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मथुरा दूसरा केंद्र होगा। वहीं तीसरा मुरादाबाद में 150 की क्षमता वाला ऐसा केंद्र बनेगा। हालांकि प्रदेश के कई शहरों में यह केंद्र संचालित हो रहे हैं। इसमें बाराबंकी, वाराणसी, कानपुर, लखनऊ समेत अन्य शहर शामिल हैं।
जिला प्रोबेशन अधिकारी विकास चंद्र ने बताया कि राजकीय बाल गृह बालिका केंद्र बनाने की स्वीकृति मिल गई है। यह केंद्र वृंदावन के चैतन्य विहार में स्थित विधवा आश्रय स्थल में बनाया जाएगा। इसमें अनाथ या पॉक्सो पीड़ित 10 से 18 साल तक की बालिकाओं को शरण दी जाएगी। यह केंद्र दो सौ की क्षमता का होगा। इसे व्यवस्थित करने की कवायद चल रही है। जल्द ही केंद्र संचालित किया जाएगा।