पाले गिरने से जिले में आलू और सरसों की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। सैकड़ों बीघा आलू की फसल खराब होने की बात कही जा रही है। पाला पड़ने से आलू का तना गलने लगा है। कृषि वैज्ञानिक अब खेतों में नमी बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं ताकि पाले का फसल पर कम असर पड़े।
जिले में 18000 हेक्टेयर में आलू की फसल खड़ी है। फरह, राया और बलदेव ब्लाक में यह फसल सर्वाधिक है। इस बार फसल अच्छी होने की उम्मीद लगाई जा रही थी। लेकिन तीन दिन से पड़ रहे पाले ने आलू को बीमार बना दिया है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि आलू का तना कमजोर होता है। वह पाले की मार को नहीं झेल पाएगा। गलने के कारण पौधा गिर जाएगा।
टैंटीगांव में आलू की फसल को काफी नुकसान हुआ है। गांव सरकोरिया में किसान राकेश सिंह, मुकेश और चंद्रपाल ने बताया कि इस बार बड़ी मेहनत करके फसल उगाई थी लेकिन मौसम ने सब चौपट कर दिया। इस बार पैदावार भी बुरी तरह से प्रभावित होना तय माना जा रहा है। सुरीर क्षेत्र में बीती रात पड़े पाले के चलते पन्नालाल की 35 बीघा, पप्पू इरौली गूजर की 40 बीघा, पाछो की 10 बीघा, संजू की 10 बीघा फसल बर्बादी के कगार पर है।