सम्मान के शिखर पर विराजे पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की हंसी ठिठोली की गवाह ब्रज की गलियां हैं। कभी साइकिल पर तो कभी यमुना में नौका विहार, आज भी उनके मित्र उनकी मस्ती को याद करते हैं। इसके अलावा मथुरा के पेड़े वाजपेयी की खास पसंद में शुमार हैं। प्रधानमंत्री रहने के दौरान यहां से जाने वाले लोग उनके लिए पेड़े जरूर ले जाते थे।
पेड़े के दीवाने अटल ठंडाई के भी शौकीन रहे हैं। यहां ठंडाई छानने के उनके कई किस्से हैं। उनके नजदीकी रहे लोग बताते हैं कि यमुना तट पर ठंडाई छानकर अटल बिहारी वाजपेयी अक्सर नौका विहार पर जाते थे।
उनका मस्त अंदाज ही हर शख्स को उनका मुरीद बना देता था। 1957 के चुनाव में बेशक उनको यहां की सियासी जमीन पर हार नसीब हुई लेकिन वह यहां के लोगाें की आत्मीयता देख अटूट रिश्ता जोड़ बैठे। मथुरा का जिक्र आने पर वह पेड़े की याद जरूर करते हैं।
मनमौजी स्वभाव, कभी ठहाके तो कभी मीठी मुस्कान बिखेरने वाले अटल श्रीकृष्ण नगरी के वाशिंदों से अटूट प्रेम रखते हैं। उन्होंने अपना पहला लोकसभा चुनाव मथुरा से ही लड़ा। जमानत भी जब्त हुई लेकिन यह ब्रज रज का महात्म्य उन्हें अपना मुरीद बना चुका था।
वाजपेयी के बेहद नजदीकी रहे वरिष्ठ भाजपा नेता बांकेबिहारी माहेश्वरी कहते हैं कि आपातकाल में जब अटलजी को पैरोल मिली तो वह सीधे मथुरा आ गए। गांधी पार्क पहुंचे और प्रेम हलवाई के यहां खूब मंगौड़े खाए। प्रधानमंत्री रहने के दौरान वे दीनदयाल धाम के संरक्षक भी रहे।