संपूर्ण ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री महालक्ष्मी की आराधना का पर्व (दीपावली) व्यापारियों के लिए इस बार शुभ है। बुधवार के दिन सौभाग्य योग के साथ स्वाति और विशाखा नक्षत्र इसे खास बना रहे है। इस बार पूजन के मुहूर्त की संख्या और समय भी बेहतर रहेगा।
दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान के निदेशक पंडित कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि बुधवार का दिन और सौभाग्य योग इस दिवाली को कारोबारियों के लिए शुभ बना रहा है। दिवाली का पूजन इस बार स्वाती और विशाखा नक्षत्र में होगा। उन्होंने बताया कि स्वाति नक्षत्र 13 बजकर 34 मिनट तक है और इसके बाद विशाखा नक्षत्र आ जाएगा।
हालांकि, ज्योतिर्विद ओमप्रकाश गौतम के अनुसार दोपहर 12 बजे से डेढ़ बजे तक राहु काल रहेगा। उन्होंने इससे पहले या फिर बाद में लक्ष्मी का पूजन करना श्रेष्ठ बताया है। वहीं धनु लगन का प्रवेश 9 बजकर 21 मिनट से 11 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। धनु लगन का स्वामी गुरु है। इस लगन में लोहा, चमड़ा, प्लास्टिक, खेल, खिलौना, तेल, रबर, वाहन, मशीनरी आदि से पूजन करना लाभप्रद रहेगा।
लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त
सुबह छह बजे से 9:30 बजे तक लाभ अमृत चौघड़िया
मिल-फैक्ट्री पूजन के लिए सुबह 10:30 बजे से 12:00 बजे तक शुभ चौघड़िया
प्रतिष्ठानों पर पूजन के लिए शाम तीन बजे से छह बजे तक चर लाभ चौघड़िया और शाम 5:30 बजे से 19:39 बजे तक वृष लगन प्रदोष चौघड़िया श्रेष्ठ
घर में पूजन के लिए रात 8:45 बजे से अमृत चौघड़िया, रात 11:53 मिनट तक शुभ मुुहूर्त
भगवान धनवंतरि की होगी पूजा
कार्तिक मास की त्रयोदशी अर्थात धनतेरस का पर्व सोमवार को मनाया जाएगा। यह दिन भगवान धनवंतरि के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। प्रीतियोग की मौजूदगी इसे और शुभ मना रही है। श्रीराधागोविंद देव पंचांग के संपादक कामेश्वर चतुर्वेदी के अनुसार धतेरस पर किसी को भी धन उधार नहीं देना चाहिए। यमुना स्नान, दान, दीपदान का विशेष महत्व होता है। इस दिन को आयुर्वेद के प्रवर्तक भगवान धनवंतरि के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। चिकित्सक, वैद्य इनकी पूजा अर्चना करते हैं। द्वारिकाधीश मंदिर के विधि एवं मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी के अनुसार मंदिर में शाम साढ़े चार बजे धनवंतरि जयंती मनाई जाएगी।
चारमुखी दीपक जलाने से नहीं होती अकाल मृत्यु
मान्यता है कि धनतेरस के दिन घर में मृत्यु के देवता यम की पूजा करने के साथ ही चारमुखी दीपक जलाने से एक वर्ष तक अकाल मृत्यु नहीं होती है।