देश में शांति और सद्भावना के प्रचार के लिए कन्याकुमारी से शुरू हुई आशा यात्रा बुधवार को नंद बाबा की कोषस्थली कोसी पहुंच गई। यहां यात्रियों का जोरदार स्वागत किया गया। इस दौरान यात्रा के मार्गदर्शक आध्यात्मिक गुरु श्रीएम ने अमर उजाला से बातचीत की और यात्रा के बारे में बताया।
श्रीएम ने बुधवार को कहा कि धर्म के सही अर्थ को जानने का प्रयास लोगों ने किया ही नहीं। हर किसी ने धर्म की अलग परिभाषा बनाई और उसी के लिए लड़ने-मरने पर उतारू हो गया। जबकि वास्तविकता यह है कि कोई भी धर्म की लड़ाई नहीं लड़ रहा है, यह तो संप्रदाय की लड़ाई है।
उन्होंने कहा कि तेरा धर्म और मेरा धर्म कह कर हमने धर्म को बहुत छोटा कर दिया है। धर्म तो सार्वभौम है और सभी के लिए है। जैसे सत्य बोलना धर्म है, दूसरों के कष्ट को महसूस करना और उसके निवारण के लिए प्रस्तुत होना धर्म है। धर्म का कोई झगड़ा ही नहीं है। ये झगड़े तो राजनीतिक हैं।
नेता स्वहित में जनभावनाओं का अपने-अपने तरीके से लाभ उठाते हैं। यह लोगों की जिम्मेदारी है कि वे धर्म के मर्म को समझें। लोग खुद को सिर्फ मानव समझें तो अपने आप ही शांति और सद्भाव का माहौल बन जायेगा। यही मानव धर्म है।
आशा यात्रा बुधवार को हाईवे पर कल्प कुटी आश्रम के प्रांगण में पहुंची। यहां पालिकाध्यक्ष भगवत रुहेला, पूर्व चेयरमैन जगपाल सिंह, सुमेर सिंह, रश्मि पालीवाल, अरविंद वशिष्ठ, जिले सिंह प्रधान, जबर सिंह ने श्रीएम का स्वागत किया। आश्रम में विष्णुदास महाराज तपस्वीजी के जीवन के बारे में विस्तार से बताया गया।
पटियाला के प्रिन्स किशनदास तपस्वी विष्णुदास बने। उन्होंने पूरे विश्व में आध्यात्मिक यात्रा करके शांति और सद्भावना का संदेश दिया। तपस्वीजी कायाकल्प के विशेषज्ञ थे। उन्होने स्वयं अपना तीन बार और वर्ष 1935 में पंडित मदनमोहन मालवीय को कायाकल्प करके स्वस्थ किया था।
आशा यात्रा में सभी समुदायों के एक सौ पचास के करीब लोग शामिल हैं। कुछ लोग समय-समय पर शामिल हो जाते हैं। सभी मानव एकता मिशन से जुड़े हैं।
इनमें कर्नाटक के रिटायर्ड डीजीपी से लेकर यूरोपियन महिलाएं तक हैं। यात्री प्रतिदिन 15 से 20 किलोमीटर का सफर पैदल तय करते हैं।
यात्रा का दिनेश दीक्षित, धरमन सिंह, सरमन सिंह, गंगाश्याम, देवेन्द्र पालीवाल, अशोक अरोड़ा, प्रदीप देव, अजीज कुरैशी, लोकेश गौड़ आदि ने स्वागत किया। संचालन पंडित बृजमोहन मिश्रा झांसी ने किया।