हाईवे पर विष्णुदास आश्रम कल्पकुटी में श्रीश्री रविशंकर की प्रेरणा से आर्ट ऑफ लिविंग के ध्यान और योग शिविर के चार दिवसीय कार्यक्रम का समापन हुआ। प्रशिक्षक जयंती ने प्रशिक्षुओं को जीने की कला बताई।
जयंती ने कहा कि जिंदगी जीने का अलग अंदाज होना चाहिए। यह कुदरत का अनमोल तोहफा है, जो कई जन्मों के बाद मिलता है। परम पिता परमात्मा का धन्यवाद करना है, जिसने इस कायनात में जीवन व्यतीत करने का अवसर प्रदान किया। ध्यान और योग मानव को निरोग व स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है।
शिविर में विभिन्न प्रांतों के 50 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। पालिकाध्यक्ष भगवत रुहेला, चौधरी सुमेर सिंह, बृजमोहन मिश्रा, हरेकृष्ण नेताजी, शिवराम प्रधान आदि मौजूद थे।
कल्पघर नाम से प्रसिद्ध है विष्णुधाम
विष्णुधाम आश्रम ब्रज क्षेत्र में कल्प घर नाम से प्रसिद्ध है। तपस्वी विष्णुदास कायाकल्प के ज्ञाता थे। उन्होने अपने शरीर का कई बार कायाकल्प किया। वे 185 वर्ष तक जीवित रहे।
1954 में झांसी में ब्रह्मलीन होकर कोटवन में समाधिस्थ करके मंदिर बनवाया गया। तपस्वी विष्णुदास ने शिक्षाविद् मदनमोहन मालवीय का कायाकल्प किया था। यहां आर्ट ऑफ लिविंग केंद्र आरंभ कराकर गतिविधियां शुरू कराई जाएंगी। इसके लिए भवन निर्माण का कार्य जोरों से चल रहा है।