वृंदावन। मथुरा-वृंदावन में हर वर्ष उमड़ने वाले लाखों श्रद्धालुओं को संभालने के लिए पुलिस व प्रशासन अनुमानित भीड़ के अनुसार प्लान तैयार करके व्यवस्थाएं करते हैं, लेकिन अभी तक यह इंतजाम नाकाफी रहे हैं। मथुरा में विश्व प्रसिद्ध होली उत्सव हो या फिर मुड़िया मेला, स्थानीय प्रशासन के सामने चुनौती बनी रहती है। अब हाईकोर्ट ने भीड़ प्रबंधन के समग्र और दीर्घकालिक योजना पेश करने के निर्देश दिए हैं।
मथुरा-वृंदावन में वर्षभर धार्मिक आयोजनों की लंबी श्रृंखला चलती रहती है। प्रमुख आयोजनों में होलिकोत्सव, मुड़िया मेला, जन्माष्टमी, राधाष्टमी, झूलन उत्सव, कार्तिक मास, गोवर्धन पूजा और ब्रज की विभिन्न परिक्रमाएं शामिल हैं। आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या 8 से 10 लाख तक पहुंच जाती है। खासकर होली और मुड़िया मेले में पूरा ब्रज क्षेत्र मानव सैलाब में तब्दील हो जाता है। वहीं श्रीबांकेबिहारी मंदिर में सामान्य दिनों में ही प्रतिदिन करीब 50 हजार श्रद्धालु पहुंचते हैं, जबकि त्योहारों पर यह संख्या दो लाख तक पहुंच जाती है। शनिवार और रविवार को तो वृंदावन में और भी बुरे हालात हो जाते हैं। एकादशी पर गोवर्धन और वृंदावन में और बुरा हाल होता है। इस दिन लोग दूर दराज से परिक्रमा लगाने के लिए आते हैं।
कागजों में प्लान, जमीन पर पुलिस का सहारा
हर बड़े आयोजन से पहले प्रशासनिक बैठकों का दौर चलता है, रूट डायवर्जन तय किए जाते हैं और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि भीड़ प्रबंधन अब भी मुख्यतः पुलिस के भरोसे ही संचालित हो रहा है। कई बार मास्टर प्लान और विस्तृत प्रस्ताव तैयार किए गए, लेकिन जमीन पर उतरते हुए नजर नहीं आए। नतीजा, प्रमुख मार्गों पर जाम, मंदिरों के आसपास धक्का-मुक्की और आपात स्थिति में निकासी की कठिनाई होती है।
आधारभूत ढांचा बनाना सबसे बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार मथुरा-वृंदावन की सबसे बड़ी समस्या सीमित इंफ्रास्ट्रक्चर है। संकरी गलियां, अपर्याप्त पार्किंग, अस्थायी बैरिकेडिंग और ठहरने की सीमित सुविधाएं भीड़ को संभालने में बाधा बनती हैं। जरूरत है कि सड़कों के चौड़ीकरण, मल्टीलेवल पार्किंग बनाई जाएं, बाहरी क्षेत्रों में पार्किंग हब विकसित हों और वहां से श्रद्धालुओं को मंदिर लाने जाने के लिए निर्धारित वाहन चलाएं जाएं। श्रद्धालुओं के लिए शेल्टर होम, पेयजल, शौचालय और चिकित्सा सुविधाओं का व्यापक इंतजाम किया जाना जरूरी है। हालांकि बांकेबिहारी कॉरिडोर योजना बनाई गई थी, लेकिन अभी उसके काम कछुआ गति से चल रहे हैं।
तकनीक का अभाव, केवल सीसीटीवी ही सहारा
भीड़ प्रबंधन में जहां बड़े शहरों और धार्मिक स्थलों पर सीसीटीवी निगरानी, ड्रोन मॉनिटरिंग और रियल टाइम डेटा का उपयोग हो रहा है, वहीं मथुरा-वृंदावन अभी भी पारंपरिक तरीकों पर निर्भर है। विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल क्राउड कंट्रोल सिस्टम, मोबाइल अलर्ट, लाइव फुटफॉल मॉनिटरिंग और इमरजेंसी रिस्पॉन्स मैकेनिज्म को लागू करने सेे लाभ मिल सकता है।
स्थानीय लोगों और व्यापारियों की चिंता
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि भीड़ से जहां व्यापार को लाभ होता है, वहीं अव्यवस्था के कारण कई बार नुकसान भी उठाना पड़ता है। जाम और भीड़ के कारण न केवल आम जनजीवन प्रभावित होता है, बल्कि शहर की छवि भी प्रभावित होती है। उनका मानना है कि प्रशासन को अल्पकालिक उपायों के बजाय स्थायी समाधान की दिशा में काम करना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन का अनुभव मिल सके।
भीड़ प्रबंधन के बहुत से आयाम होते हैं। जो संसाधन हैं, उनमें हाल ही में कई भीड़ वाले आयोजनों को सफलतापूर्वक किया गया है। विस्तृत प्लान तैयार किया जा रहा है। इसे अदालत में पेश किया जाएगा। - चंद्र प्रकाश सिंह, जिलाधिकारी