वृंदावन। नगर के सप्त देवालयों में से एक ठाकुर मदन मोहन मंदिर की सुरक्षा एवं श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इसकी योजना तैयार की है। कार्य होने पर मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षक हो जाएगा।
मंदिर का रखरखाव व संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किया जा रहा है। एएसआई ने अब मंदिर के सौंदर्यीकरण एवं सुरक्षा को लेकर कदम उठाया है। योजना कि टेंडर प्रक्रिया पूरी हो जाने पर कार्य शुरू किया जाएगा। प्रस्तावित योजना में मंदिर की चहारदीवारी का निर्माण कराया जाएगा। परिक्रमा मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर की प्राचीनता की झलक मिल सके, इसके लिए सौ मीटर लंबी दीवार के ऊपर लोहे की ग्रिल लगाई जाएगी। परिक्रमा मार्ग से मंदिर की सीढ़ियों तक रेड स्टोन से पाथवे बनाया जाएगा। मंदिर के निचले परिसर में दीवार के सहारे घास के बीच भी पाथवे का निर्माण किया जाएगा। इससे पहले एएसआई द्वारा मंदिर की प्राचीन गुंबद को केमिकल से साफ किया जा रहा है। गर्भगृह के समीप प्राचीन सभा कक्षा की छत की मरम्मत का कार्य चल रहा है। इस कार्य को फतेहपुर सीकरी के कारीगर कर रहे हैं जबकि निर्माण सामग्री राजस्थान से लाई गई है। संवाद
500 वर्ष पुराना है मंदिर
वृंदावन के प्राचीन सात मंदिरों में से एक श्रीमदन मोहन मंदिर लगभग 500 वर्ष पुराना है। जमीन से 70 फीट ऊंचे लाल पत्थर के मंदिर का निर्माण चैतन्य महाप्रभु के पार्षद सनातन गोस्वामी महाराज की प्रेरणा से मुल्तान के व्यापारी रामदास कपूर ने संवत 1647 में कराया था। एएसआई के वरिष्ठ संरक्षक सहायक नितिन प्रिय राहुल ने बताया कि प्राचीन मदन मोहन मंदिर को संरक्षित करने के साथ ही उसके सौंदर्यीकरण का कार्य जल्द किया जाएगा। वर्तमान में केमिकल से सफाई की जा रही है। पाथ वे एवं दीवार का निर्माण लगभग 25 लाख रुपये से किया जाएगा।