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Mathura News: शिक्षाष्टक-एक बिंदु एक सिंधु विषयक प्रदर्शनी का शुभारंभ

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वृंदावन शोध संस्थान में संगोष्ठी का शुभांरभ करते हुए अतिथिगण। 
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वृंदावन। वृंदावन शोध संस्थान में शुक्रवार को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय गोष्ठी आरंभ हुई। पहले दिन शिक्षाष्टक-एक बिंदु एक सिंधु विषयक प्रदर्शनी का उद्घाटन और व्याख्यान, विवरणिका का लोकार्पण एवं पुस्तक विमोचन के कार्यक्रम हुए।
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अध्यक्षता करते हुए आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने कहा कि शिक्षाष्टक श्री चैतन्य महाप्रभु की वांग्मयी मूर्ति है। चैतन्य महाप्रभु के शिक्षा संबंधी श्लोक बिखरे हुए थे जिन्हें बाद में एक स्थान पर संकलित किया गया, जिसे शिक्षाष्टक के नाम से जाना जाता है। शुभारंभ पर मलय दास एवं उनके साथियों ने नाम संकीर्तन किया। अतिथियों ने दीप जलाकर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। श्रीमन्महाप्रभु चैतन्य के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। संस्थान के निदेशक ने अतिथियों का शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया। संयोजन डॉ. अभिषेक बोस ने जबकि संचालन डॉ. राजेश शर्मा ने किया।
मुख्य वक्ता प्रो. नृसिंह प्रसाद भादुड़ी ने कहा कि शिक्षाष्टक के प्रथम श्लोक की व्याख्या में आठ प्रक्रियाएं निहित हैं जिनमें नाम संकीर्तन को यज्ञ बताया गया है। दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. होमेन सिंह ने कहा कि मणिपुरी समाज पर चैतन्य महाप्रभु के गौड़ीय संप्रदाय का गहरा प्रभाव है। डॉ. अभिषेक बोस ने शिक्षाष्टक श्लोकों की महत्ता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर जापानी विद्वान प्रो. कियोकाजु ओकिता की पुस्तक मेकिंग ऑफ वृंदावन तथा डॉ. गिर्राज नांगिया और डॉ. भागवत कृष्ण नांगिया की पुस्तक प्रेममयी राधा का लोकार्पण किया गया।
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कार्यक्रम में अनंतवीर्य दास, डॉ. प्रतापपाल शर्मा, डॉ. चंद्रप्रकाश शर्मा, डॉ. विनोद बनर्जी, डॉ. अच्युतलाल भट्ट, डॉ. मनोज मोहन शास्त्री, कपिलदेव उपाध्याय, डॉ. नृत्यगोपाल शर्मा, अभिषेक मिश्रा, चंद्रवती शर्मा आदि मौजूद रहे।
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