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Mathura: ट्रैफिक के दबाव से कराहती रहीं गलियां, हाईवे पर वाहनों की कतार; जाम में फंसे बुजुर्ग की थम गईं सांसें

Wed, 31 Dec 2025 08:54 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

साल के आखिरी दिन मथुरा-वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कई गुना इजाफा हुआ। बुधवार सुबह से ही जाम लगने का सिलसिला शुरू हो गया। हाईवे पर दोपहर से शाम छह बजे तक जाम लगा रहा।
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हाईवे पर लगा जाम। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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मथुरा में नए साल के स्वागत के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण मथुरा-वृंदावन की गलियां जाम से कराहती रहीं। हाईवे पर भी वाहन एक किमी लंबी तक कतार में रेंगते रहे। राहगीरों ने चंद मिनटों की दूरी घंटों में तय की। नए साल की पूर्व संध्या पर बाजारों में भी भारी भीड़ रही।
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हाईवे पर नरहौली चौराहे पर दोनों ओर एक-एक किमी लंबी वाहनों की कतार लगी रही। रेंग कर वाहन गंतव्य के लिए निकले। यही हाल भूतेश्वर, कृष्णानगर, सौंख रोड, पुराना बस स्टैंड और बीएसए रोड का रहा। गलियों में भी जाम लगा रहा। साल के आखिरी दिन मथुरा-वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कई गुना इजाफा हुआ। बुधवार सुबह से ही जाम लगने का सिलसिला शुरू हो गया। हाईवे पर दोपहर से शाम छह बजे तक जाम लगा रहा। कई किलोमीटर लंबा जाम लगने पर पुलिस ने खुलवाने के प्रयास किए, लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी।

मथुरा-वृंदवान रोड का भी यही हाल रहा। यातायात पुलिस के सारे इंतजाम फेल हो गए। ई-रिक्शा व ऑटो वालों ने जाम की समस्या को और बढ़ा दिया। बेतरतीब ई-रिक्शा व ऑटो खड़ा करके सवारियां भरते नजर आए। हालांकि पुलिस कर्मी प्रत्येक चौक-चौराहे पर जाम खुलवाने में लगे रहे, लेकिन बुधवार रात तक सफलता नहीं मिली। एसपी ट्रैफिक मनोज यादव ने बताया कि नए साल पर भीड़ के दबाव की वजह से यातायात व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है। हालांकि प्रत्येक चौक-चौराहे पर पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं और डिवाइडर समेत अन्य इंतजाम भी किए गए हैं ताकि जाम न लगे।
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बुजुर्ग की थम गईं सांसें, नहीं खुला जाम
चंदनवन निवासी परचून की दुकान करने वाले रोहित गुप्ता ने बताया कि उनके 70 वर्षीय पिता नागेंद्र गुप्ता के पैर में कुछ समय पहले फ्रैक्चर हो गया था। मंगलवार को वह पिता को लेकर अस्पताल एक्सरे कराने के लिए निकले। राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगा हुआ था, उन्होंने शहर के अंदर से नया बस स्टैंड होते हुए हाईवे पर आने का फैसला किया। कार में उनके पिता नागेंद्र गुप्ता, फरीदाबाद निवासी बहनोई विजेंद्र मोहन वार्ष्णेय, पिता के मित्र टीटू साथ थे।

वह स्टेट बैंक के करीब पहुंचे थे कि अचानक पिता के सीने में दर्द उठा और सांस लेने में तकलीफ होने लगी। कार में बैठे सभी लोग नागेंद्र गुप्ता के हाथ पैर की मालिश करने लगे। बहनोई विजेंद्र मोहन वार्ष्णेय ने कार की स्पीड तेज की, लेकिन नये बस स्टैंड पर लगे जाम में कार फंस गई। जाम में फंसी कार को निकालने के लिए परिजन ने काफी प्रयास किया, लेकिन कार नहीं निकाल सके।

इधर, धीरे-धीरे नागेंद्र गुप्ता की तबीयत बिगड़ गई और उन्होंने सांस लेना बंद कर दिया। परिजन उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे, यहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुत्र रोहित गुप्ता ने बताया कि यदि नए बस स्टैंड पर जाम न लगा होता तो उनके पिता की जान बच सकती थी। जाम में फंसी कार को निकालने के लिए उन्होंने नए बस स्टैंड पर खड़े पुलिस कर्मियों से भी गुहार की, लेकिन वाहनों की संख्या इतनी अधिक थी कि पुलिसकर्मी जाम खुलवाने में सफल नहीं हो सके।

 
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