मथुरा। छह-छह हजार रुपये में फर्जी जन्मप्रमाण पत्रों के खुलासे के बाद पुलिस मामले की जांच में जुटी है तो वहीं प्रशासन ने भी इसे गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। माना जा रहा कि फर्जीवाड़े के आरोपियों ने बड़े पैमाने पर फर्जी जन्मप्रमाण पत्र जारी किए हैं। चूंकि ग्राम पंचायत सचिव की भी भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
बुधवार को कोतवाली पुलिस ने जनसेवा केंद्र की आड़ में फर्जी जन्मप्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया था। साथ ही जनसेवा केंद्र संचालक समेत पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। वहीं पुलिस की प्रारंभिक जांच में छाता की ग्राम पंचायत फालिन और गुहिता दसविस्वा के ग्राम पंचायत सचिव चंद्रपाल की संदिग्ध भूमिका बताई जा रही है। माना जा रहा है कि सचिव और जनसेवा केंद्र संचालक की मिलीभगत से यह खेल चल रहा था। इस खेल में कई अन्य के शामिल होने की भी आशंका जताई जा रही है। हालांकि डीपीआरओ ने ग्राम पंचायत सचिव को निलंबित कर दिया है और पुलिस अपने स्तर से मामले की जांच कर रही है।
वहीं डीएम चंद्रप्रकाश सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीएम प्रशासन अमरेश कुमार की अध्यक्षता में डीपीआरओ धनंजय जायसवाल और डीडीओ गरिमा खरे की तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। जांच कमेटी फरवरी 2025 से लेकर 24 दिसंबर तक सचिव की आईडी से बने हुए जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्रों की जांच करेगी। यह भी देखा जाएगा कि आरोपियों ने कितने बाहरी व्यक्तियों के जन्मप्रमाण पत्र बनाए हैं। बताया जा रहा कि एक साल में आरोपियों ने सैकड़ों लोगों के जन्मप्रमाण पत्र बनाए हैं। हालांकि जांच कमेटी प्रत्येक बिंदु पर जांच करने के बाद एक सप्ताह में रिपोर्ट डीएम को सौंपेगी।
-चारों आरोपियों को मिली जमानत
इधर, पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए हाईवे के चंदनवन फेस-1 निवासी जितेंद्र, जनसेवा केंद्र संचालक हरिओम, चैतन्य लोक कॉलोनी निवासी धीरज और राया के ग्राम पिलुखनी निवासी अभिषेक को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। हालांकि अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम के यहां से आरोपियों को जमानत मिल गई और जेल से बाहर आ गए। कोर्ट द्वारा जारी आदेश में इसकी पुष्टि हुई है।