अमर उजाला रूपायन अचीवर अवार्ड जीतने के बाद डा. लक्ष्मी गौतम जोश से लबरेज हैं। उनका कहना है कि इस पुरस्कार ने उनके जज्बे और कार्य क्षमता में वृद्धि की है। इसे उन्होंने विधवा और निराश्रित महिलाओं को समर्पित किया। मथुरा जिले से अवार्ड जीतने वाली वे अकेली महिला हैं।
अपने निवास पर अमर उजाला से खास बातचीत में डा. लक्ष्मी गौतम ने बताया है कि महिला उत्थान तभी संभव है, जब महिलाएं स्वयं आगे आकर महिला सशक्तिकरण के लिए काम करें। उन्हाेंने कहा कि घरेलू महिलाओं को समाज सेवा के लिए आगे आना चाहिए।
16 दिसंबर को दिल्ली के निर्भया रेप कांड को याद करते हुए उन्होंने कहा कि अमर उजाला ने 16 दिसंबर को रूपायन अचीवर अवार्ड समारोह आयोजित उन सभी बेटियों का सम्मान किया है जो कभी न कभी समाज में प्रताड़ित हुईं हैं। उन्होंने कहा कि प्रताड़ित होने वाली महिलाओं की पहचान को छुपाकर उन्हें शर्मिंदगी महसूस कराने के बजाए हमें उनकी हौसलाफजाई करनी चाहिए। दुख झेलने वाली महिला वास्तव में बहादुर होती है, उसकी बहादुरी को छुपाना अपमान करने के समान है।
अमर उजाला रूपायन अचीवर अवार्ड मिलने पर डा. लक्ष्मी गौतम के पति विजय गौतम और धेवती वृंदारिका ने हर्ष जताते हुए अमर उजाला का आभार जताया है। दोनों ने कहा कि इससे अधिक कार्य करने शक्ति और प्रेरणा मिलेगी।