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आखिर कितने साल में सुधरेंगे गांवों के हालात

Thu, 08 Sep 2016 12:22 AM IST
अमर उजाला मथुरा
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गोवर्धन विधानसभा - फोटो : अमर उजाला
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आखिर कितने साल लगेंगे गांवों की दशा सुधरने में। इस सरकार के ही साढ़े चार साल हो गए। वोट मांगने जब आए थे तो चौपालों पर बैठकर ऐसे वादे किए कि गांव चमन बन जाएगा लेकिन मिला कुछ नहीं है। न सड़क है और न ही बिजली। पीने के पानी को भी परेशान हैं। किसी को बुखार भी आ जाए तो मथुरा भागना पड़ता है। गोवर्धन विधानसभा के गांवों में पहुंची अमर उजाला की टीम ने जब लोगों की समस्याएं जानी तो कुछ इसी तरह के ही जवाब मिले। 
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वाकई ग्रामीण इलाकों में स्थिति खराब है। स्वास्थ्य सेवाएं चौपट हैं। अगर कहीं अस्पताल का भवन बन गया है तो वहां डाक्टर की तैनाती नहीं हो पाई है। गोवर्धन विधानसभा की ग्राम पंचायत पलसों में प्रधान पति बलराम ने कहा कि पानी का सबसे बड़ा संकट है। जयदेव, मुकेश शर्मा, बल्देव शर्मा, माधव, रामफल, श्याम सुंदर, दुर्गा प्रसाद, राधा कृष्ण पांडेय ने बताया कि गांव में पानी की पुरानी टंकी क्षतिग्रस्त पड़ी है। बीते चार दिन से बिजली का पता नहीं है। बारिश के चलते खेतों में जलभराव हो गया है तो पशुओं को चारे का संकट है। 

राजस्थान वार्डर से सटे गांव मुडसेरस के प्रधान पति बच्चू सिंह ने कहा विधायक राजकुमार रावत ने तो कभी सुनवाई की ही नहीं। निरोत्तम सिंह ने कहा कि गांव में आरओ प्लांट लगवाने की मांग थी लेकिन पूरी ही नहीं हो पाई है। दौलतपुर के प्रधान आशु भी गांव की समस्या को लेकर विधायकजी से मिले। बताया कि गांव में खड़ंजे का निर्माण कराया जाना था लेकिन नहीं हुआ। 
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मडौरा तो विकास में सबसे ज्यादा पिछड़ा दीखता है। प्रधान उस्मान ए इशाक खां और बच्चू सिंह ने बताया कि विधायक जी से भगौसा से नगला धन्नू को जोड़ने वाले रास्ते के निर्माण को कई दफा मिले लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। रास्तों पर कीचड़ इतनी है कि मोटरसाइकिल फिसल जाती हैं।

भगौसा निवासी रामखिलाड़ी ने भी बरसाना रोड से गांव को जोड़ने वाले रास्ते की दुर्दशा की कहानी बयां की। कहते हैं विधायकजी ने सड़क बनवाने का भरोसा दिया था लेकिन आज तक नहीं बनी है। अब बताया जा रहा है कि यह बजट स्वीकृत हो गया है। पर बन जाए तब जानो।
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मुख्य समस्याएं 
- जर्जर रास्ते
- लड़खड़ाई बिजली
- स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल
- पेयजल की बड़ी समस्या
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