राजस्थान की पीसीपीएनडीटी (प्री कान्सेंप्शन एंड प्री नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक) की टीम ने यमुनापार के जिस अमर हास्पिटल में छापा मारकर भ्रूण के लिंग परीक्षण का घिनौना खेल पकड़ा था उसके संचालक के पास चिकित्सा की कोई डिग्री नहीं है। वह अस्पताल में गंभीर मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करता था। सवाल यह भी उठता है कि इतना सब खुलेआम होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग इससे अनजान कैसे बना रहा।
राजस्थान पीसीपीएनडीटी टीम ने शहर के अमर हास्पिटल पर कार्रवाई कर यहां के स्वास्थ्य विभाग, पीसीपीएनडीटी समिति को आइना दिखाया है। इस पूरे खेल में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी संदिग्ध है। विभागीय सूत्रों के अनुसार इस अस्पताल के संचालक दिनेश कुमार ठेनुआं के स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी से दोस्ती है।
इतना ही नहीं सीएमओ कार्यालय के कर्मचारी इस अस्पताल में नियमित जाते रहते थे। इस अस्पताल में न तो अल्ट्रासाउंड मशीन का पंजीकरण था और न ही संचालक के पास कोई चिकित्सीय डिग्री। इतना ही नहीं अस्पताल में वेंटिलेटर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध थीं। ऐसे में सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या भ्रूण के लिंग परीक्षण के घिनौने खेल को सीएमओ कार्यालय का संरक्षण प्राप्त था।
आईएमए ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
अमर हास्पिटल में लिंग परीक्षण के घिनौने खेल के खुलासे के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. एसबी अग्रवाल, सचिव डा. अनिल चौहान ने कहा कि अमर हास्पिटल के संचालक न तो एमबीबीएस डॉक्टर है और न ही इनका इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से किसी प्रकार का कोई संबंध है।
ऐसे झोलाछाप का इस तरह से हास्पिटल संचालित कर उसमें गंभीर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करना, बिना रजिस्ट्रेशन के अल्ट्रासाउंड मशीन का होना और भ्रूण परीक्षण जैसा जघन्य अपराध करना जंगलराज जैसा है। आईएमए प्रशासन और सीएमओ कार्यालय के साथ है, दोषी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।