मथुरा। बारिश के बाद मलेरिया और डेंगू के बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जिले में दो दर्जन कॉलोनियों सहित 35 स्थानों को संवेदनशील घोषित किया है। इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी के साथ जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर लोगों को डेंगू और मलेरिया से बचाव के उपाय बता रही हैं तथा लार्वा की जांच भी कर रही हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राधावल्लभ ने बताया कि पिछले साल औरंगाबाद, नंदनवन, फरह, मांट, नौहझील में डेंगू या मलेरिया के मामले सामने आए थे, जहां जलभराव और गंदगी की समस्या अधिक रहती है, उन्हें संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इन इलाकों में नियमित फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और बुखार के मरीजों की निगरानी की जाएगी। जागरूकता अभियान के दौरान लोगों से घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने, कूलर, गमले, टायर और पानी की टंकियों की नियमित सफाई करने तथा पूरे बाजू के कपड़े पहनने की अपील की जाएगी। बुखार आने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराने की सलाह भी दी जाएगी।
सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। आशा और एएनएम कार्यकर्ता भी गांवों एवं कॉलोनियों में सर्वे कर बुखार के मरीजों की पहचान करेंगी। विभाग का उद्देश्य संभावित मामलों की समय रहते पहचान कर संक्रमण को फैलने से रोकना है।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. गोपाल गर्ग ने बताया कि पूर्व में जो क्षेत्र बाढ़ प्रभावित थे, वहां रोग फैलने की आशंका रहती है। इसलिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में टीम जागरूकता कार्यक्रम और छिड़काव का कार्य कर रही हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि डेंगू और मलेरिया से बचाव में स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करें तथा अपने आसपास साफ-सफाई बनाए रखें, क्योंकि रोकथाम ही इन बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।