वृंदावन (मथुरा)। वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की अक्षय तृतीया( ३ मई) पर्व पर ठाकुर बांके बिहारी महाराज सुबह चरण दर्शन और शाम को सर्वांग दर्शन देंगे। तीन मई को मनाई जाने वाली अक्षय तृतीया पर्व पर बांकेबिहारी मंदिर सहित सप्त देवालयों में तैयारियां प्रारंभ हो गईं हैं। मंदिर में अभी से कर्नाटकी चंदन को गुलाब जल में भिगोकर बड़ी घिसाई शुरू हो चुकी है।
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत आचार्य प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि गर्मी में ठाकुरजी को शीतलता प्रदान करने के लिए अक्षय तृतीया पर सेवायत ठाकुरजी के शरीर पर चंदन का लेपन करेंगे। इसके लिए मंदिरों में चंदन घिसने का कार्य भी सेवायत लगन और श्रद्धा के साथ किया जा रहा है।
अक्षय तृतीया पर ठाकुरजी के संपूर्ण श्रीअंगों पर चंदन का लेपन कर चरण कमलों में चंदन के अनेक गोले रखे जाते हैं ताकि प्रभुजी को शीतलता प्राप्त होती रहे। मंदिर में अभी से कर्नाटकी चंदन को गुलाब जल में भिगोकर बड़ी मात्रा में चंदन की घिसाई शुरू हो चुकी है, जिन्हें गोले बनाकर सेवा के लिए तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर ठाकुरजी चांदनी रंग का सनिया (रेशमी धोती) धारण करते हैं।
ठंडाई का लगेगा भोग
ठाकुरजी को सतुआ के लड्डुआ, केशरिया छैना की खीर, खरबूजा, ककड़ी, सरबत, फल, काजू, बादाम, पिस्ता, केशर, पोस्ता, कालीमिर्च, गुलकंद, दूध मिश्रित विशेष ठंडाई का भोग अर्पित किया जायेगा।
इन मंदिरों में मनेगा पर्व
अक्षय तृतीया पर श्रीधाम वृंदावन के राधा दामोदर, राधावल्लभ, राधागोविंद, राधा मदनमोहन, राधागोकुलानंद, राधारमण, राधा श्याम सुंदर, राधास्नेह बिहारी आदि मंदिरों में चंदन शृंगार के अद्भुत दर्शन होंगे।
ज्योतिषाचार्य आचार्य श्यामदत्त चतुर्वेदी ने बताया कि इस तिथि को जो भी दान पुण्य किया जाता है, उसे यह तिथि अक्षय बना देती है। यह तिथि वसंत ऋतु के अंत एवं ग्रीष्म ऋतु के आगमन का पर्व है। नारद पुराण, मत्स्य पुराण आदि में इस तिथि के महत्व का विस्तृत उल्लेख मिलता है। किसी भी प्रकार के मुहुर्त के बिना भी इस तिथि पर कोई भी शुभ कार्य किया जाता है।
बांकेबिहारी पहनेंगे पाजेब
वृंदावन। अक्षय तृतीया पर श्री बांके बिहारी महाराज के श्री चरण दर्शन होते हैं और भक्त उन्हें पाजेब भेंट करते हैं। अक्षय तृतीया पर ठाकुर बांकेबिहारी महाराज पाजेब पहन कर अपने भक्तों को दर्शन देंगे।