मथुरा के सुप्रसिद्ध ठाकुर द्वारकाधीश मंदिर में अक्षय तृतीया का पर्व पुष्टिमार्गीय परंपरा के अनुसार बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मंदिर के विधि एवं मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट ने इस अवसर पर आयोजित विशेष सेवा-पूजा की विस्तृत जानकारी साझा कीअक्षय तृतीया के पावन अवसर से ठाकुर जी की सेवा पद्धति में ऋतु परिवर्तन के अनुसार निम्नलिखित बदलाव किए गए हैं आज के दिन विशेष रूप से ठाकुर जी के श्रीअंग पर शीतल चंदन लगाया गया।
आज से ठाकुर जी को ऋतु के अनुकूल ठंडी वस्तुओं का भोग लगाना प्रारंभ हो गया है। इसमें विशेष रूप से सत्तू, शरबत और शीतल जल का भोग अर्पित किया गया।बढ़ती गर्मी को देखते हुए ठाकुर जी को हल्के और ठंडे वस्त्र धारण कराए गए। साथ ही, ठाकुर जी की सुख-सुविधा के लिए पंखा भी धराया गया।राकेश तिवारी जी ने बताया कि 'अक्षय' का अर्थ है जिसका कभी क्षय (नाश) न हो। इस दिन किए गए दान और पुण्य का फल अनंत काल तक बना रहता है।
मंदिर प्रांगण में भक्तों ने एक-दूसरे को दान दिया और दान की हुई वस्तुएं ठाकुर जी को भी अर्पित कीं।आज के दिन सोना खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है, इसलिए श्रद्धालुओं ने जमकर खरीदारी की।बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने यमुना जी में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया और मंदिरों में दर्शन-पूजन के साथ दान-पुण्य किया।