हरियाणा में शुरू हुए जाट आंदोलन ने पश्चिम यूपी के लिए रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। आंदोलन के चलते यूपी की फ्लोर मिलों के लिए गेहूं की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। कई मिलें तो गेहूं न होने के चलते बंद होने के कगार पर हैं। मिल मालिकों का कहना है कि यही हालात रहे रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। रसोई के प्रमुख आधार आटा, मैदा और सूजी की कीमत बढ़ने का अनुमान है।
बाजार की मांग को पूरा करने के लिए इस समय भारतीय खाद्य निगम खुला बाजार बिक्री योजना के तहत गेहूं की बिक्री कर रहा है। ऐसे में पश्चिम यूपी की अधिकांश फ्लोर मिल हरियाणा के गोदामों से गेहूं खरीद रही हैं। बीते दिनों शुरू हुए जाट आंदोलन के चलते हरियाणा में हिसार, झज्जर सहित कई इलाकों में यातायात पूरी तरह ठप है। इसके चलते यूपी में मिलों के लिए आने वाले गेहूं के वाहन भी आंदोलन में फंसे हैं।
फ्लोर मिल संचालक प्रतुल अग्रवाल ‘अलंकार’ ने बताया उन्होंने इस बार टेंडर हरियाणा के हिसार जिले से लिया था। उनके वाहन आंदोलन में फंस गए है। इसके चलते मिलें बंद होने के कगार पर आ गई हैं। मिल सुपरवाइजर भी आंदोलन में फंसे है। मिल संचालक संदीप बंसल ने बताया कि उनके पास भी कम स्टॉक बचा है। अगर कुछ दिन और यही हालात रहे तो मिल बंद करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं होगा।
वहीं अगर आंदोलन जल्द समाप्त नहीं हुआ तो बाजार में मांग और सप्लाई के बीच की खाई और चौड़ी हो जाएगी। इसका सीधा असर गेहूं से बने उत्पाद आटा, मैदा और सूजी की कीमतों पर पड़ेगा। सीजन का आखिरी समय होने के चलते इस समय मंडियों में आवक भी लगभग नगण्य चल रही है।
हरियाणा से गेहूं खरीद इसलिए
कारोबारी सूत्रों के अनुसार भारतीय खाद्य निगम की खुले बाजार बिक्री योजना में जो रेट दर्शाए जा रहे हैं, उसमें हरियाणा में 1550 रुपये का रेट और दो प्रतिशत केंद्रीय कर अदायगी है। यूपी में रेट 1680 के करीब है और इस पर 6.5 प्रतिशत कर की अदायगी है। यही कारण है कि पश्चिम यूपी के अधिकांश मिल संचालक हरियाणा से ही गेहूं मंगा रहे हैं।