बीएलओ और ओबीसी सर्वे ड्यूटी के बहिष्कार पर प्राथमिक शिक्षक संघ और जिला प्रशासन आमने-सामने आ गया है। शिक्षक संघ ने बीएलओ के विशेष अभियान में जुड़ने से इंकार कर दिया है तो जिला प्रशासन ने 30 शिक्षकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के लिए तहरीर दे दी है।
पंचायत चुनाव के लिए जिले में प्रदेश स्तरीय नामावली पुनरीक्षण का कार्य चल रहा है। इसके लिए जिले के करीब 1500 शिक्षकों को बीएलओ बनाया गया है। शिक्षकों ने इसका बहिष्कार कर दिया है। इसके लिए शिक्षक हाईकोर्ट के आदेश का हवाला दे रहे हैं, जबकि जिला प्रशासन भी हाईकोर्ट और शासन के आदेश की बात करते हुए शिक्षकों पर दबाव बनाए हुए है।
शुक्रवार को प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष रामकृष्ण रावत की अध्यक्षता में शिक्षकों ने बैठक कर इस स्थिति से निपटने की रणनीति बनाई। इसके बाद बड़ी संख्या में शिक्षक उपजिला निर्वाचन अधिकारी एडीएम प्रशासन से मुलाकात करने पहुंचे। यहां बहिष्कार और आदेश पालन पर शिक्षक नेताओं और एडीएम प्रशासन धीरेंद्र कुमार सिंह के साथ काफी बहस हुई। दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क दिए। इस दौरान तड़का-भड़की भी हुई। आखिरकार बीएलओ का कार्य न करने वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दे दिए गए। इसमें 30 शिक्षकों के खिलाफ थाना सदर में तहरीर दी गई है।
प्राथमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष रामकृष्ण रावत ने शनिवार को रैपिड सर्वे प्रशिक्षण और रविवार को विशेष अभियान का बहिष्कार जारी रखने की अपील शिक्षकों से की है। इससे दोनों ओर विवाद और गहराता नजर आ रहा है। इस दौरान जिला मंत्री लायक सिंह, अशोक लवानियां, लोकेश शर्मा, गौरव यादव, दिनेश चौधरी, मुकुल कांत, विजय, रौशन लाल, महेश, जयपाल, हरीश, सरोज शर्मा, बबिता सारस्वत, उर्वशी त्रिपाठी, बबली, निशा, ऊषा, अवधेश, कौशल सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।