बीते लगभग 10 माह से सत्याग्रहियाें की जवाहर बाग में मौजूदगी से उद्यान विभाग की बेशकीमती जमीन पर प्रशासन की स्थिति बेदखल सी हो गई है। अब तो पुलिस की मौजूदगी में भी अफसर जवाहर बाग में प्रवेश की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में दो दिन पहले हुई फायरिंग की रिपोर्ट प्रदेश मुख्यालय को भेजी जा रही है।
यह पहली बार नहीं है जब प्रशासन और सत्याग्रहियों के बीच तनाव की स्थिति बनी हो लेकिन प्रशासनिक अफसरों ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इस बार दोनों ओर फायरिंग भी हुई। इस घटना ने प्रशासन को सत्याग्रहियों की ताकत का अहसास करा दिया है। बीते 10 माह से जवाहर बाग में आम लोगों का आवागमन पूरी तरह से बंद है। उद्यान विभाग के कर्मचारियों ने भी कार्यालय छोड़ दिया है। किसान भी किसी समस्या के लिए अब यहां नहीं जाते हैं। सवाल यह भी हैं कि ढाई से तीन हजार लोगों के लिए रसद का इंतजाम आखिर कौन कर रहा है। रसद देने के पीछे उसका मकसद क्या है। बगैर रोजगार इनके भोजन की व्यवस्था कैसे हो रही है। जानकारों का कहना है पूर्वांचल के साथ मध्यप्रदेश से बडे़ वाहनों में इन सत्याग्रहियों के लिए रसद सामग्री भेजी जा रही है। वहीं जवाहर बाग में मुखियाजी के पास मध्यप्रदेश के नंबर वाली लक्जरी गाड़ियां हैं। यहां इंटरनेट और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होता है।
फेल हुआ खुफिया तंत्र
जनपद में एक बार फिर खुफिया तंत्र फेल हो गया। जेल में गैंगवार के बाद पुलिस पर जवाहर बाग में फायरिंग का अंदेशा भी अफसरों को नहीं था। 10 माह से डेरा जमाए सत्याग्रहियों की गतिविधियों के साथ उनकी बढ़ती ताकत से भी खुफिया तंत्र अंजान है।
नलकूप पर कब्जा
जवाहर बाग में कब्जा जमाए सत्याग्रहियों ने यहां स्थापित दो नलकूपों पर अपना कब्जा जमा लिया है। इन दोनों नलकूपों का संचालन सत्याग्रहियों द्वारा ही किया जा रहा है। इनके द्वारा उद्यान विभाग की बिजली का उपयोग भी भरपूर हो रहा है।