ब्रज में अधिक मास के दौरान धार्मिक आयोजनों की धूम है। भोर से शाम तक मंदिरों में दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ रहा है। सोमवार को मंदिर द्वारिकाधीश में गुलाबी घटा सजाई गई तो श्रीकृष्ण जन्मस्थान श्रीराम कथा के दौरान छप्पन भोग सजाए गए। गोपाल मंदिर में वामन जयंती का आयोजन किया गया।
श्रीद्वारिकाधीश मंदिर में सोमवार को आषाढ़ द्वादशी के दिन शयन के दौरान राजाधिराज गुलाबी घटा में भक्ताें के सामने आए। इसके लिए पूरे मंदिर परिसर को गुलाबी रंग में सजाया गया था। ठाकुरजी के परिधान से लेकर सब कुछ गुलाबी था। भक्ति के इस रंग को देख भक्त भी आनंदित हो उठे।
देर शाम तक मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ रही। पूरा परिसर द्वारिकाधीश की जयजयकार से गूंज रहा था। इस अवसर पर मंदिर अधिकारी श्रीधर चतुर्वेदी, राकेश तिवारी, मुरलीधर, भोले जी, मंदिर मुखिया ब्र्रजेश आदि मौजूद रहे। वहीं श्रीगोपाल वैष्णव गोपाल मंदिर वामन जयंती मनाई गई। प्रभु का सुबह वैदिक मंत्रों के साथ अभिषेक किया गया। वैदिक स्तुति और वामन स्वरूप में शृंगार हुआ। शाम को द्वादशी मनोरथ में भव्य पुष्प महल बनाया गया। ठाकुरजी को भोग लगाए।
जन्मस्थान पर श्रीराम की जयजयकार
मथुरा। लीलाधर भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि के लीला मंच पर अधिकमास में श्रीराम कथा की अमृत धारा बरस रही है। सोमवार को कथा व्यास पुण्डरीक गोस्वामी ने श्रीराम के राज्याभिषेक और वनवास कथा का वर्णन किया। इस दौरान पुण्डरीक गोस्वामी ने भक्तों के समूह के बीच भगवान श्रीराम के विवाहोपरांत गृहस्थ जीवन के पालन और उसके बाद राजा दशरथ के मन में राज्याभिषेक के विचार का वर्णन किया।
इसी से पैदा हुई वनवास की स्थिति को भी उन्होंने भक्तों को सुनाया। एक पल में बदली स्थितियों को सुन भक्त भी भावुक हो गए। संस्थान के सचिव कपिल शर्मा, सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, डा. चंद्रभान गुप्ता, मुख्य अधिशासी राजीव श्रीवास्तव आदि मौजूद थे।