गिरिराज महाराज की नगरी में अधिकमास के अवसर पर देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु परिक्रमा लगाने आ रहे हैं। रात भर राधे-राधे श्याम मिला दे के नारे गूंज रहे हैं। इस मास में 60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के परिक्रमा किए जाने की संभावना है। गिरिराज नगरी के अधिकांश गेस्ट हाउस, धर्मशालाएं बुक हो चुके हैं।
अधिक मास के बारे में गिरिराज संत सेवा आश्रम के महंत संत राधामोहन दास सिद्ध ने बताया कि अधिक मास को मलमास भी कहा जाता है। यह कहा जाता है कि यह स्पर्श करने योग्य नहीं है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इसके संबंध में पौराणिक दृष्टांत भी है।
उन्होंने बताया कि एक बार भगवान विष्णु मलमास का हाथ पकड़ कर गोलोक में श्रीकृष्ण के सामने ले आए। श्रीकृष्ण ने उनसे कहा कि उन्होंने बहुत अच्छा किया जो मलमास को साथ लेकर आ गए जिसे वे स्वीकार कर रहे हैं। इसे पूजने वालों के दु:ख और दरिद्रता का नाश होगा। श्रीकृष्ण ने इस मलमास से प्रसन्न होकर अधिक मास को बारह मासों में सर्वश्रेष्ठ कहा है।
चूंकि भगवान श्रीकृष्ण ने गिरि गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर धारण किया था और श्यामसुंदर स्वयं गिरिराज हैं। अत: इस मास में गिरि गोवर्धन पर्वत की दंडवती और खड़ी परिक्रमा करने की श्रद्धालुओं में होड़ लग गई है। मलमास मेले का केंद्र गोवर्धन ही है।