यमुना प्रदूषण के संबंध में एनजीटी में सुनवाई की तिथि तय होने के बाद अफसरों में खलबली मची है। लंबे समय से शहर के बीच धड़ल्ले से चल रहे उद्योगों पर शिकंजा कसने के लिए पुरानी फाइलें खंगाली जा रही हैं। इन उद्योगों के बिजली कनेक्शन काटने की तैयारी की जा रही है।
गौरतलब है कि यमुना प्रदूषण के संबंध में उच्च न्यायालय के आदेशों की लगातार अवहेलना के बाद अब राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) में इसकी सुनवाई चल रही है। इसमें 27 अप्रैल की तिथि नियत है।
इधर, पूर्व में ही वृंदावन में कूड़ा जलाए जाने के मामले में एनजीटी ने अपने कड़े रुख से इरादे साफ कर दिए हैं। मथुरा शहर में भी प्रदूषण विभाग की शह पर लंबे समय से औद्योगिक इकाइयां संचालित की जा रही हैं। इनमें अधिकांश चांदी पॉलिश वाले इकाइयां बाइब्रेटर, निकिल, ढोल आदि हैं। प्रदूषण विभाग की ओर से इन इकाइयों की संख्या 65 बताई जाती है, जबकि हकीकत में ये आंकड़ा 250 के करीब है।
फाइलों में दबा बिजली कनेक्शन काटने का आदेश
एनजीटी में याचिका दायर करने वाले गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी का कहना है कि शहर के बीच औद्योगिक इकाइयों का संचालन अफसरों की शह पर है। जब कभी न्यायालय सख्ती दिखाता है तो आदेश जारी कर दिए जाते हैं और बाद में लीपापोती कर दी जाती है। अगस्त 2015 में भी न्यायालय की सख्ती पर यमुना कार्य योजना के नोडल अफसर ने बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता को पत्र लिखकर औद्योगिक इकाइयों के कनेक्शन काटने के निर्देश दिए गए थे। इस पत्र के साथ 65 औद्योगिक इकाइयों के नाम-पते की सूची भी सौंपी गई।
लखनऊ में अधिकारियों ने की मंत्रणा
मथुरा-वृंदावन के मामलों की एनजीटी में बढ़ती संख्या और आदेशों पर अमल के संबंध में सचिव पर्यावरण के साथ एडीएम कानून व्यवस्था सुरेंद्र कुमार शर्मा और ईओ टीएन चौबे की मंत्रणा हुई। सचिव पर्यावरण ने सभी मामलों में अब तक की कार्रवाई की जानकारी ली।