महोली रोड की जर्जर हालत और अतिक्रमण को लेकर मंडलायुक्त की सख्ती के बाद गुरुवार को प्रशासन हरकत में आ गया। नगर मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में पुलिस बल के साथ हाईवे की ओर से रोड को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान चला तो लोगों में खलबली मच गई। कार्रवाई में सत्ताधारी दल की एक महिला नेत्री के प्रतिष्ठान को भी नहीं बख्शा गया।
दो दिन पहले मथुरा आए मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर ने महोली रोड पर अतिक्रमण और नाला निर्माण न होने पर खासी नाराजगी जताई थी। उन्होंने खुद मौके पर जाकर हालात देखे और अफसरों को सख्त हिदायत दी। गुरुवार को दोपहर में नगर मजिस्ट्रेट हेम सिंह, पालिका के ईओ केपी सिंह पुलिस बल और जेसीबी के साथ महोली रोड स्थित बजरंग धर्मकांटा पहुंचे और अतिक्रमण हटाना शुरू कर दिया।
अभियान को लेकर अफसरों की सख्ती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने सपा महिला सभा की पूर्व अध्यक्ष अनुराधा चौधरी के प्रतिष्ठान के आगे बने इंटरलाकिंग फर्श को भी तोड़ दिया। महिला नेत्री ने विरोध किया तो पुलिस ने उन्हें जबरन हटा दिया। इतना ही नहीं परिवारीजनों ने अभद्रता की तो पुलिस कर्मियों ने सभी को खदेड़ दिया। कार्रवाई शुरू होते ही अन्य लोग भी तेजी के साथ अपने कब्जों को हटाने में जुट गए थे।
प्रशासन की कड़ी परीक्षा अब
अतिक्रमण को लेकर जिस सख्ती के साथ प्रशासन ने गुरुवार को अभियान चलाया है उसके बाद से कारोबारी सांसत में हैं। प्रशासन की कड़ी परीक्षा भी बजरंग चौराहे से नया बस स्टैंड के बीच अभियान पहुंचने के बाद होगी। महोली रोड पर अतिक्रमण की असली समस्या इसी क्षेत्र में है।
वर्षों से उलझा है अतिक्रमण का मसला
महोली रोड पर अतिक्रमण का मसला वर्षों से उलझा हुआ है। इसे सुलझाने के लिए अनेक स्तर के प्रयास किए गए हैं। कई बार प्रशासनिक अफसरों की कमेटियां भी गठित की गई लेकिन व्यापारियों के विरोध के चलते कोई नतीजा नहीं निकल सका।
बदहाल है महोली रोड
पिछले एक दशक से महोली रोड की मरम्मत नहीं हुई। यहां जगह-जगह डेढ़ से दो फुट गहरे गड्डे हैं। बड़े वाहनों ने तो इस मार्ग से गुजरना ही बंद कर दिया है। इसमें आए दिन दोपहिया वाहन और रिक्शा गिरते हैं। हाल यह कि इस रोड पर एक दर्जन से अधिक नर्सिंगहोम और क्लीनिक हैं जहां मरीज आते आते कराह उठते हैं।