मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट यमुना रिवर फ्रंट विकास योजना से घाटों को क्षति और यमुना के हालातों को लेकर दायर जनहित याचिका पर प्रदेश सरकार और संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को जवाब दाखिल करना है। इस आदेश का असर विकास कार्यों पर दिख रहा है।
शनिवार को यमुना रिवर फ्रंट विकास योजना के कार्य की गति धीमी रही। रोजाना सैकड़ों की तादात दिखने वाले मजदूर और कई मशीनों में से शनिवार को कम ही दिखे। हालांकि कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग के अधिकारी पूरी गति से कार्य होने की बात कहते रहे।
सिंचाई विभाग के एक्सईएन एसके गोयल ने बताया कि सिंचाई विभाग ने यमुना रिवर फ्रंट विकास योजना में इंटर सैप्टर लाइन डालने के साथ ही घाटों की आधारशिला रखने का कार्य तेजी से किया है। लाइन बिछाने का लगभग 40 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। एक्सईएन का कहना है कि एएसआई के नियमों का विभाग ने किसी प्रकार उल्लंघन नहीं किया है।
वहीं इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा भेजे गए नोटिस के बारे में बताया कि विभाग को अभी नोटिस मिला नहीं है। नोटिस मिलने के बाद काउंटर दाखिल करने के लिए विधिक राय ली जाएगी।
बता दें कि वृंदावन के सामाजिक कार्यकर्ता महंत मधुमंगल शरणदास शुक्ल ने वृंदावन के घाटों को बचाने और यमुना बैड में डाली जा रही सीवर लाइन से धार्मिक आस्था के साथ हो रही खिलवाड़ पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की है।
इस पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार सहित संबंधित 12 विभागों को नोटिस जारी कर 20 अक्तूबर तक जवाब मांगा है।