एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी (फाइल फोटो)
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मथुरा। प्रदेश के बहुचर्चित रहे जवाहरबाग कांड में बुधवार को तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और फरह थानाध्यक्ष संतोष यादव की हत्या के मामले मेें जेल में बंद तीन और आरोपियों की रिहाई हो गई। तहसील मारपीट प्रकरण का भी एक आरोपी जमानत पर जेल से छूट गया है।
2 जून 2016 को जवाहर बाग में हुई वारदात में अवैध कब्जाधारियों पर एसपी सिटी तथा थानाध्यक्ष की हत्या का आरोप था। राजेश और रामधनी निवासी जिला बस्ती तथा राधे श्याम निवासी रसूलाबाद कानपुर देहात 2016 से ही जेल में बंद थे। करीब एक माह पूर्व हाईकोर्ट से जमानत संबंधी आदेश हुआ था।
जिसके आधार पर एडीजे- 6 प्रभारी न्यायालय ने तीनों का रिहाई आदेश जारी किया। जबकि तहसील मारपीट प्रकरण के आरोपी रविकांत निवासी बहूदी खुर्द लखीमपुरखीरी को जिला एवं सत्र न्यायालय से जमानत का आदेश हुआ है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता एलके गौतम ने बताया कि अभी तक हत्याकांड में करीब दो दर्जन आरोपी रिहा हो चुके हैं।
रामवृक्ष यादव का है अभी भी वारंट
जवाहर बाग कांड का मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव का कोर्ट द्वारा अभी भी वारंट जारी किया हुआ है। तहसील मारपीट प्रकरण में उसके नाम की अभी भी कोर्ट में आवाज लगाई जाती है। जानकारी रहे सीबीआई द्वारा अभी तक रामवृक्ष यादव के बारे में कोर्ट को अधिकृत रूप से नहीं बताया गया है कि रामवृक्ष यादव मरा है या जिंदा। जिसके चलते रामवृक्ष यादव का नाम करीब एक दर्जन मुकदमों में शामिल है।
सीबीआई ने हत्या के मामले में नहीं दाखिल किया आरोप पत्र
तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और फरह थानाध्यक्ष संतोष यादव की हत्या के मामले में सीबीआई द्वारा अभी तक आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया है। हाईकोर्ट द्वारा आरोपियों को लगातार जमानत मिल रही हैं। जमानत का आधार अभियुक्तों का लगातार जेल में बंद होना भी है। सभी अभियुक्त वारदात के बाद से लगातार जेल में है, जो उनकी जमानत का आधार बन रहा है।