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Mathura News: लावारिस और बेसहारा मरीजों के लिए बनेगा अलग वार्ड

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मथुरा। जिला अस्पताल में अब लावारिस और बेसहारा मरीजों की देखरेख के लिए एक अलग विशेष वार्ड बनाने की योजना तैयार की गई है। अस्पताल प्रशासन ने निर्णय लिया है कि सर्जिकल वार्ड के पीछे स्थित गली में नई व्यवस्था के तहत विशेष वार्ड का निर्माण किया जाए, ताकि बेसहारा व लावारिस मरीजों को अन्य सामान्य मरीजों से अलग रखा जा सके।
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महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल में रोजाना 4 से 5 मरीज ऐसे आते हैं जो लावारिस अथवा बेसहारा होते हैं। अभी इन्हें अन्य मरीजों के साथ ही रखना पड़ता है, जिससे अन्य मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इनमें कुछ मरीज तो ऐसे होते हैं जो कि अपने आसपास गंदगी करके रखते हैं। हालांकि गंदगी को कई बार साफ कराया जाता है। इस कारण पूरे वार्ड में दुर्गंध रहती है और अन्य मरीजों को परेशानी होने के साथ उनके स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। लावारिस मरीजों के लिए बनाए जा रहे नए वार्ड में चिकित्सा सुविधाओं के साथ ही सुरक्षा और सफाई के भी विशेष इंतजाम किए जाएंगे।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमन कुमार ने बताया कि नए वार्ड के निर्माण से अस्पताल में कामकाजी वातावरण में भी सुधार होगा। इस कदम से लावारिस मरीज का बेहतर उपचार और देखभाल की जा सकेगी। सुरक्षा उपायों के लिए अस्पताल में विशेष निगरानी की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए अतिरिक्त स्टाफ की नियुक्ति भी की जाएगी।
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पहले भी सर्जिकल वार्ड के पीछे ही होता था लावारिसों का इलाज
- पूर्व में जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड के पीछे गली में लावारिस मरीजों के लिए 10 बिस्तर का वार्ड बना हुआ था। यहां लावारिस मरीजों को भर्ती कर उनका उपचार किया जाता था। नई बिल्डिंग के निर्माण के बाद वार्ड और बिस्तरों की संख्या बढ़ी तो उन्हें अन्य मरीजों के साथ ही भर्ती करना शुरू कर दिया गया, लेकिन इसके कारण अन्य मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी होने लगी।

सीएमएस ने खुद खड़े होकर कराई वार्ड की सफाई
- जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. नीरज अग्रवाल ने दो दिन पूर्व स्वयं खड़े होकर सर्जिकल वार्ड के पीछे कबाड़ खाने में तब्दील स्थान की साफ सफाई कराई। मरीजों को यहां से शिफ्ट करने के बाद से यह वार्ड कबाड़ खाने में तब्दील हो गया था। कर्मचारी अस्पताल का क्षतिग्रस्त सामान यहीं भर देते थे।
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