फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mathura News: यमुना विहार कुंज में लगेगा आस्था का कुंभ

विज्ञापन
विज्ञापन
वृंदावन। संत प्रेमानंद महाराज ने मांट क्षेत्र स्थित बेलवन मंदिर के समीप जहांगीरपुर खादर में नवीन आश्रम बना लिया है। पौने नौ बीघा में फैले यमुना विहार कुंज आश्रम में साधकों एवं शिष्यों के लिए कुटिया के साथ ही संत प्रेमानंद के लिए साधना स्थली तथा उपचार के लिए डायलिसिस यूनिट भी बनाई गई है। गुरु पूर्णिमा पर देश-विदेश से आने वाले हजारों दीक्षित शिष्यों के लिए विशाल पंडाल भी तैयार किया है। आश्रम तक जाने-आने के लिए पहुंच मार्ग का भी निर्माण तेजी से हो रहा है।
विज्ञापन

संत प्रेमानंद महाराज के भक्तों और श्रद्धालुओं के लिए इस बार का गुरु पूर्णिमा पर्व बेहद खास होने जा रहा है। स्वास्थ्य संबंधी कारणों और एकांत में भजन-साधना की आवश्यकता को देखते हुए संत अब वृंदावन रमणरेती स्थित अपने पुराने केली कुंज आश्रम के बजाय यमुना किनारे बने मांट क्षेत्र में बेलवन मंदिर से लगभग एक किलोमीटर दूर जहांगीरपुर में नए आश्रम यमुना विहार कुंज में अधिक समय बिता रहे हैं। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा महोत्सव का भव्य आयोजन संत के दोनों आश्रमों में किया जाएगा। इसकी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मांट क्षेत्र स्थित जहांगीरपुर गांव के समीप यमुना नदी के तट पर बेलवन में महालक्ष्मी मंदिर से लगभग एक किलोमीटर दूर नवीन आश्रम यमुना विहार कुंज बना है। जहांगीरपुर के किसान मूलचंद व संत के शिष्य रिंकू राजपूत ने तीन माह पहले खरीदी थी। शेष जमीन एक माह पूर्व खरीदी है।

ऐसा है आश्रम का स्वरूप
किसान मूलचंद ने बताया कि संत प्रेमानंद महाराज का आश्रम पौने नौ बीघा जमीन में बना है। इसमें से एक बीघा जमीन में पक्का निर्माण कराया है। इसके अलावा सेवक परिकर के लिए कुटिया एवं दो बड़े हॉल बनाए गए हैं। जहां संत नियमित रूप से शिष्य परिकरों के साथ सत्संग करते हैं और राधारानी की सेवा अर्चना की जाती है। शेष जमीन में पेड़-पौधे लगाए गए हैं। आश्रम परिसर में एक पोर्टेबल कंटेनर में आधुनिक डायलिसिस मशीन स्थापित की गई है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम समय-समय पर यहीं उनका उपचार करती है। बताया जा रहा है कि आश्रम नदी कि किनारे हैं। इसलिए मानसून में नदी के बढते जलस्तर से सुरक्षा के लिए तटबंध के पास सात से आठ फीट ऊंची मजबूत पक्का चबूतरा बनाया गया है। उसके ऊपर दीवार खड़ी की गई है। संत के वृंदावन स्थित पुराने श्रीराधा केली कुंज आश्रम से सड़क मार्ग द्वारा करीब 15 किलोमीटर की दूर पर स्थित नवीन आश्रम में वृंदावन के जुगल घाट से नाव से यमुना पार कर शिष्य आश्रम पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन


गुरु पूर्णिमा पर शिष्यों के लिए किए गए खास प्रबंध
संत प्रेमानंद के नवीन यमुना विहार कुंज आश्रम में गुरु पूर्णिमा पर देशभर से आने वाले शिष्यों के लिए विशाल पंडाल बनाया गया है। इसमें सात हजार शिष्य एक साथ आ सकते हैं। यहां 23 से 28 जुलाई तक जो शिष्य संत प्रेमानंद से दीक्षा ले चुके हैं, वहीं शिष्य गुरु पूर्णिमा पर संत का सानिध्य प्राप्त कर सकेंगे। शिष्यों और अधिकारियों के आश्रम जाने के लिए बेलवन से होकर आश्रम तक पक्का मार्ग का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। 29 जुलाई को महाराज जी अपने पुराने आश्रम केली कुंज पहुंचेंगे, जहां वह भक्तों से मुलाकात करेंगे। केली कुंज आश्रम को भव्य रूप से सजाया गया है। मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर संपूर्ण आश्रम परिसर में आध्यात्मिक और धार्मिक संदेशों वाली पट्टिकाएं लगाई गई हैं। महोत्सव के दौरान प्रतिदिन विधि-विधान के साथ चरण पूजन का आयोजन किया जाएगा।

-
शांति और एकांत के लिए चुना नया ठिकाना

पिछले दो महीनों से संत प्रेमानंद महाराज केली कुंज आश्रम में कम समय बिता रहे हैं। खराब स्वास्थ्य के चलते उन्होंने गत 18 मई से अपनी नियमित पदयात्रा भी स्थगित कर रखी है। स्थानीय लोगों और आश्रम से जुड़े सूत्रों के अनुसार, वृंदावन स्थित केली कुंज में श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ के कारण महाराज जी को एकांत और विश्राम का पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा था। यमुना किनारे स्थित यमुना विहार कुंज का वातावरण प्राकृतिक, शांत और कोलाहल से पूरी तरह मुक्त है। हाल ही में सामने आए एक वीडियो में भी महाराज ने अपने शिष्यों को उपदेश देते हुए केवल राधा नाम का जप करने और भीड़ न लगाने की अपील की थी।


त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा, बिना अनुमति प्रवेश वर्जित
आश्रम और संत प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा को लेकर कड़े इंतजाम किए गए हैं। बेलवन में लक्ष्मी मंदिर के पास से आश्रम की ओर जाने वाले मार्ग पर आश्रम से लगभग एक किलोमीटर पहले ही सेवाद्वार बनाकर सेवादार तैनात किए गए हैं। जो कि हर आने वाले से उनकी पूरी जानकारी लेने के साथ ही उद्देश्य भी जानने का प्रयास करते हैं। सामान्य श्रद्धालुओं या अनाधिकृत व्यक्तियों को आश्रम मार्ग पर आगे बढ़ने की अनुमति नहीं है। केवल प्रशासनिक अधिकारियों और आश्रम की अधिकृत गाड़ियों को ही मुख्य परिसर तक जाने दिया जा रहा है। सुरक्षा के लिए जगह-जगह मार्ग पर पुलिस बल भी तैनात है। आश्रम प्रबंधन ने आसपास के स्थानीय किसानों को अपने खेतों तक आने-जाने के लिए मार्ग का उपयोग करने की छूट दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें