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‘धर्मांतरण और गौ हत्या भारतीय संस्कृति पर प्रहार’

Tue, 25 Nov 2014 05:30 AM IST
Mathura
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वृंदावन। देश में धर्मांतरण और गौ हत्या की घटनाआें पर संतों ने चिंता जताई है। सोमवार को धर्मनगरी में आयोजित संत सभा में इन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि ये घटनाएं भारतीय संस्कृति के मूल पर प्रहार हैं। यदि इन्हें रोकने के जल्द ही प्रयास नहीं किए गए तो एकता, अखंडता, सद्भाव जैसी भारतीय संस्कृति की मूल भावनाएं प्रभावित होंगी। सभा ने लव जेहाद को रोकने के लिए इंटर और डिग्री कालेजों में जनजागरण अभियान चलाने पर जोर दिया।
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परिक्रमा मार्ग स्थित कृष्ण कृपा धाम में एकत्रित हुए चार सौ से अधिक संतों ने कई मुद्दों पर मनन किया। सभा का शुभारंभ महामंडलेश्वर गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज और स्वामी परमात्मानंद महाराज ने किया। महामंडलेश्वर ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि देश में हिंदू संस्कृति को बचाने के लिए वैष्णवों के साथ संतों को भी एक होना होगा। धर्मांतरण और गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध सरकार को लगाना चाहिए।
मुख्य वक्ता भारत माता मंदिर हरिद्वार के गोविंद गिरी महाराज ने कहा कि देश के आदिवासी इलाकों में जिस प्रकार से धर्मांतरण हो रहा है वह गलत है। उन्होंने सभी संतों और धर्म जागरण विभाग के लोगों से इसे रोकने का आह्वान किया।
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सभा में लव जेहाद, धर्मांतरण, नक्सलवाद और माओवाद को रोकने पर गहन मंथन हुआ। धर्म जागरण विभाग के प्रांतीय प्रमुख राजेश्वर सिंह ने बताया कि दो दिवसीय चिंतन सभा में देशभर से तीन सौ संतों के साथ ही वृंदावन के सौ संत और हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता मंथन कर रहे हैं।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी चितप्रकाशानंद, महामंडलेश्वर आदित्यानंद महाराज, विहिप के मार्ग दर्शन मंडल के सदस्य महंत फूलडोल बिहारीदास, चार संप्रदाय आश्रम के महंत ब्रजबिहारीदास महाराज, संत गोविंदानंदतीर्थ, भागवत वक्ता संजीव कृष्ण ठाकुर, आरएसएस के नगर प्रमुख दास बिहारी अग्रवाल, धर्म जागरण विभाग प्रमुख मुकुंद , सह प्रमुख राजेंद्र, केशवधाम के निदेशक पदम, विहिप के जिलाध्यक्ष ठाकुर बच्चू सिंह आदि उपस्थित रहे।
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